अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने शनिवार को संकेत दिए कि ईरान को लेकर चल रहे तनाव पर बड़ा फैसला जल्द लिया जा सकता है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ईरान के हालिया प्रस्ताव पर विचार कर रहा है और संभावना है कि रविवार तक यह तय हो जाएगा कि बातचीत जारी रखनी है या सैन्य विकल्प अपनाना है।

ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि मौजूदा स्थिति “50-50” की है—या तो दोनों देशों के बीच एक मजबूत समझौता हो सकता है या फिर स्थिति गंभीर टकराव की ओर जा सकती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि बातचीत में प्रगति हो रही है, जिसका मकसद ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना और उसके संवर्धित यूरेनियम के प्रबंधन को सुनिश्चित करना है।

वैश्विक स्तर पर बढ़ी कूटनीतिक हलचल

इस मुद्दे पर अमेरिका के शीर्ष नेतृत्व की कई देशों से बातचीत की तैयारी है। राष्ट्रपति ट्रंप सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, मिस्र, तुर्की और पाकिस्तान जैसे देशों के नेताओं से फोन पर संपर्क कर सकते हैं।

वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी संकेत दिया है कि ईरान वार्ता को लेकर जल्द ही महत्वपूर्ण अपडेट सामने आ सकता है।

दूसरी ओर, ईरान की ओर से भी संकेत मिले हैं कि एक संभावित 14-सूत्रीय समझौता ढांचा तैयार किया जा रहा है। हालांकि बातचीत में कुछ अहम मुद्दों पर अभी भी सहमति नहीं बन पाई है।

भारत में FDI के लिहाज से अमेरिका की बड़ी छलांग

आर्थिक मोर्चे पर एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है, जहां वित्त वर्ष 2025-26 में अमेरिका भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के मामले में दूसरा सबसे बड़ा स्रोत बन गया है।

ताजा आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका ने मॉरीशस को पीछे छोड़ दिया है, जबकि सिंगापुर अभी भी शीर्ष निवेशक बना हुआ है। इसी अवधि में अमेरिका से भारत में इक्विटी निवेश दोगुना होकर 11 अरब डॉलर से अधिक पहुंच गया है।

निवेश के रुझानों में भी बदलाव देखा गया है, जहां अब कंप्यूटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर सेक्टर सबसे आगे निकल गया है। इसका मुख्य कारण डेटा सेंटर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में तेजी से हो रहा निवेश माना जा रहा है।