हिंदी भाषा नहीं भावों की अभिव्यक्ति है : हिमांशु गौतम एडवोकेट

शामली। अंतर्राष्ट्रीय मातृ दिवस पर हिमांशु गौतम एडवोकेट ने कहा कि हिंदी भाषा नहीं भावों की अभिव्यक्ति है उन्होंने कहा कि इस दिन को मनाए जाने का उद्देश्य विश्व भर में भाषायी और संस्कृति विविधता एवं बहुभाषिता का प्रसार और दुनिया में विभिन्न मातृ भाषाओं के प्रति जागरूकता लाना है।
अंतरराष्ट्रीय मातृ दिवस के लिए यूनेस्को द्वारा हर वर्ष एक थीम (विषय) निर्धारित की जाती है इस वर्ष की थीम है शिक्षा और समाज में समावेश के लिए बहुभाषावाद को बढ़ावा देना।
वर्ष 1952 में ढाका विद्यार्थियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा अपनी मातृभाषा का अस्तित्व बनाए जाने के लिए 21 फरवरी को एक आंदोलन किया गया था इसमें शहीद हुए युवाओं की स्मृति में यूनेस्को ने पहली बार वर्ष 1999 में मातृभाषा दिवस की घोषणा की। वर्ष 2000 में पहली बार 21 फरवरी को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के रूप में मनाया गया था।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार लगभग 6900 भाषाएं हैं जो विश्व भर में बोली जाती हैं विश्व में जो भाषाएं सबसे ज्यादा बोली जाती है उनमें अंग्रेजी,हिंदी, स्पेनिश, बांग्ला, रूसी,पंजाबी, अरबी, पुर्तगाली भाषा शामिल है

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