केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को दिल्ली में आयोजित ‘जनजाति सांस्कृतिक समागम’ को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान बिरसा मुंडा ने आदिवासी समाज के बीच आस्था, जंगल और अपनी पहचान की रक्षा का मजबूत संदेश दिया था। उन्होंने कहा कि उनका ऐतिहासिक ‘उलगुलान’ आंदोलन ब्रिटिश हुकूमत की जड़ों को हिला देने वाला था।
अमित शाह ने बताया कि इस वर्ष बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती मनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि उस दौर में संचार के साधन न होने के बावजूद बिरसा मुंडा ने देशभर के आदिवासी समुदायों को एकजुट करने में अहम भूमिका निभाई।
धर्मांतरण और संवैधानिक अधिकार पर बयान
गृह मंत्री ने संविधान का उल्लेख करते हुए कहा कि हर नागरिक को अपने धर्म का सम्मानपूर्वक पालन करने का अधिकार है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी तरह के लालच, दबाव या प्रलोभन से धर्म परिवर्तन स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने आदिवासी समुदायों से अपील करते हुए कहा कि वे अपनी विविध परंपराओं के साथ अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखें, क्योंकि यही भारत की असली ताकत है।
UCC पर भी स्पष्टता
अमित शाह ने समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर फैलाई जा रही भ्रांतियों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह गलत धारणा है कि UCC आदिवासी समाज की परंपराओं और जीवन शैली पर असर डालेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार ने पहले ही यह साफ कर दिया है कि जनजातीय समुदायों को उनकी परंपराओं के अनुसार विशेष संरक्षण प्राप्त रहेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि गुजरात और उत्तराखंड में लागू UCC ढांचे में भी आदिवासी समाज के लिए विशेष प्रावधान रखे गए हैं।
आदिवासी जीवन शैली की सराहना
गृह मंत्री ने आदिवासी समाज की जीवन शैली को प्रकृति के साथ संतुलन का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि जंगल, पहाड़ और जलस्रोत केवल आजीविका के साधन नहीं, बल्कि उनकी आस्था और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय बिना किसी लिखित नियम के “विविधता में एकता” के सिद्धांत को साकार करते आए हैं और यही जीवन शैली दुनिया के लिए एक स्थायी (सस्टेनेबल) मॉडल प्रस्तुत करती है।