नई दिल्ली। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में जारी हिंसा और सुरक्षा बलों की कार्रवाई को लेकर भारत ने कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय ने रिपोर्टों पर चिंता जताते हुए कहा है कि पाकिस्तान अपने ही नागरिकों पर दमन कर रहा है और मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन कर रहा है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि मुजफ्फराबाद समेत पीओके के कई इलाकों में विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 30 से अधिक लोगों की मौत की अपुष्ट रिपोर्टें सामने आई हैं। भारत ने इस घटनाक्रम को गंभीर बताते हुए पाकिस्तान की नीतियों की कड़े शब्दों में निंदा की है।

प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा लगातार फैलाई जा रही फर्जी खबरें और वीडियो उसके भीतर चल रही असफलताओं को छिपाने की कोशिश हैं। उन्होंने इसे मानवाधिकार उल्लंघनों से ध्यान भटकाने का प्रयास बताया।

भारत ने यह भी कहा कि वह इस पूरे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रखे हुए है और उम्मीद करता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान को उसके कथित कृत्यों के लिए जवाबदेह ठहराएगा।

जानकारी के अनुसार, पीओके में संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी के प्रदर्शन के दौरान हालात हिंसक हो गए थे। सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों में कई लोगों के मारे जाने की खबरें हैं, हालांकि आधिकारिक तौर पर संख्या की पुष्टि नहीं हुई है।

पाकिस्तानी अधिकारियों ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों ने पुलिस और सुरक्षा बलों पर हथियारों और पेट्रोल बमों से हमला किया, जिसके बाद कार्रवाई की गई। हालात को नियंत्रित करने के लिए कई इलाकों में इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गईं।

विरोध प्रदर्शन मुजफ्फराबाद, मीरपुर, गिलगित-बाल्टिस्तान, रावलकोट, दादियाल और अन्य क्षेत्रों में फैल गए हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है।

इस बीच, पाकिस्तान की कार्रवाई के खिलाफ ब्रिटेन में भी प्रदर्शन हुए। लंदन स्थित पाकिस्तानी दूतावास के बाहर कश्मीरी प्रवासियों ने विरोध जताया। साथ ही लगभग 50 ब्रिटिश सांसदों ने ब्रिटेन सरकार को पत्र लिखकर हिंसा रोकने और शांतिपूर्ण समाधान के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज करने की अपील की है।

भारत ने यह भी जानकारी दी कि बांग्लादेश सीमा रक्षक बल और बीएसएफ के महानिदेशक स्तर की बैठक जारी है, जिसमें सीमा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो रही है।