नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के कथित ‘शूटिंग वीडियो’ को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं को पहले गुवाहाटी हाईकोर्ट का रुख करना चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने कहा कि चुनावी विवाद सीधे शीर्ष अदालत में लाना चिंताजनक प्रवृत्ति बन रही है। कोर्ट ने टिप्पणी की, “आप गुवाहाटी हाईकोर्ट क्यों नहीं गए? उसकी अधिकारिता को कमतर न आंकें।” साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से इस मामले की सुनवाई में तेजी लाने का अनुरोध किया।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि मुख्यमंत्री बार-बार विवादित बयान दे रहे हैं और मामले की गंभीरता को देखते हुए शीर्ष अदालत को हस्तक्षेप करना चाहिए।
क्या है विवाद
यह विवाद 7 फरवरी को तब शुरू हुआ जब असम भाजपा के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर एक वीडियो साझा किया गया। वीडियो में मुख्यमंत्री कथित रूप से एक विशेष समुदाय की ओर राइफल से निशाना साधते दिख रहे थे। वीडियो पर व्यापक विरोध और राजनीतिक प्रतिक्रिया के बाद इसे हटा दिया गया।
इस घटना के बाद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और अन्य कम्युनिस्ट नेताओं ने याचिकाएं दायर कीं। उन्होंने मुख्यमंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग की। सीपीआई नेता एनी राजा ने भी नफरत फैलाने के आरोपों की निष्पक्ष जांच की अपील की है।