साध्वी ऋतंभरा ने दुर्गा मंदिर में किया ध्वजारोहण, चार हजार मातृशक्ति बनीं गवाह

अयोध्या में शुक्रवार को राम मंदिर परिसर एक बार फिर आस्था, संस्कृति और राष्ट्रभावना के भव्य संगम का केंद्र बन गया। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से मंदिर परिसर के परकोटे में स्थित दुर्गा मंदिर के शिखर पर विधि-विधान के साथ धर्म ध्वज फहराया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु और मातृशक्ति मौजूद रही, जिससे पूरा परिसर “जय श्रीराम” और देवी स्तुति के उद्घोषों से गूंज उठा।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच ध्वजारोहण
ध्वजारोहण कार्यक्रम वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुआ, जिसमें राम मंदिर आंदोलन से जुड़ी साध्वी ऋतंभरा और केंद्रीय मंत्री निरंजन ज्योति ने प्रमुख भूमिका निभाई। इससे पहले आचार्य इंद्रदेव मिश्र के मार्गदर्शन में ध्वज का विधिवत पूजन किया गया।
कार्यक्रम में करीब चार हजार महिलाओं की भागीदारी रही, जिन्हें “मातृशक्ति” के रूप में विशेष रूप से शामिल किया गया था।
साध्वी ऋतंभरा का संबोधन
अपने संबोधन में साध्वी ऋतंभरा ने इस आयोजन को सनातन संस्कृति की गौरवगाथा का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह धर्मध्वजा आने वाली पीढ़ियों को आस्था और परंपरा की विरासत से जोड़ती रहेगी।
उन्होंने राम मंदिर आंदोलन को 500 वर्षों के संघर्ष, तप और बलिदान का परिणाम बताया और 22 जनवरी को हुई रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को सांस्कृतिक पुनर्जागरण का क्षण करार दिया।
मातृशक्ति और संस्कृति पर जोर
साध्वी ऋतंभरा ने राम जन्मभूमि आंदोलन में महिलाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि देश की संस्कृति और स्वाभिमान की रक्षा में मातृशक्ति की बड़ी भूमिका रही है। उन्होंने बेटियों को संस्कारित और सशक्त बनाने पर जोर दिया और गोमाता व गंगा संरक्षण का संकल्प लेने की अपील की।
अपने भाषण के अंत में उन्होंने “मैं रहूं या न रहूं, भारत रहना चाहिए” जैसे संदेश के साथ पूरे वातावरण को भावनात्मक और राष्ट्रभक्ति से भर दिया।
आयोजन में मातृशक्ति की विशेष भूमिका
राम मंदिर ट्रस्ट के अनुसार यह आयोजन शुक्रवार को देवी भगवती को समर्पित होने के कारण विशेष रूप से मातृशक्ति के नेतृत्व में किया गया। अयोध्या के 64 क्षेत्रों से आई करीब चार हजार महिलाओं ने कार्यक्रम में भाग लिया। ध्वजारोहण की रस्सी खींचने की जिम्मेदारी भी महिलाओं और सीआरपीएफ की महिला विंग की नौ जवानों को सौंपी गई।
प्रसाद वितरण और दर्शन
कार्यक्रम के बाद सभी मातृशक्ति ने राम मंदिर परिसर के विभिन्न मंदिरों में दर्शन किए। उन्हें प्रसाद स्वरूप सिंदूर सहित अन्य धार्मिक सामग्री भी वितरित की गई।
केंद्रीय मंत्री का बयान
केंद्रीय मंत्री निरंजन ज्योति ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों रामभक्तों की आस्था और संघर्ष का प्रतीक है। उन्होंने आंदोलन के दौरान हुए संघर्षों को याद करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने इसे अपने जीवन का सौभाग्य बताया कि वे रामलला की प्राण प्रतिष्ठा जैसे ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनीं।
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