नई दिल्ली। राजधानी के रेड फोर्ट इलाके में हुए कार ब्लास्ट मामले की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने आतंकी साजिश से जुड़े मॉड्यूल को लेकर कई अहम खुलासे किए हैं। एजेंसी के अनुसार, अल-कायदा से जुड़े इस नेटवर्क के आरोपियों ने तकनीक का इस्तेमाल कर विस्फोटक और हथियार बनाने से जुड़ी जानकारी जुटाई थी।

NIA ने 14 मई को विशेष अदालत में दाखिल करीब 7,500 पन्नों की चार्जशीट में दावा किया है कि आरोपियों ने रॉकेट और IED बनाने से संबंधित जानकारी के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स का सहारा लिया और प्रयोगशाला स्तर पर विस्फोटक तैयार करने की कोशिश की।

ChatGPT और YouTube का इस्तेमाल करने का दावा

जांच एजेंसी के मुताबिक, मुख्य आरोपी जासिर बिलाल वानी पर आरोप है कि उसने ChatGPT और YouTube पर रॉकेट निर्माण और विस्फोटक मिश्रण से जुड़ी तकनीकी जानकारी खोजी। NIA का कहना है कि वह धीरे-धीरे आतंकी मॉड्यूल का तकनीकी मददगार बन गया था और संगठन के लिए इंजीनियरिंग जैसे काम कर रहा था।

यह नेटवर्क कथित तौर पर अंसार गजवत-उल-हिंद से जुड़ा बताया जा रहा है, जो अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट से संबंध रखता है।

डॉक्टरों की भूमिका भी जांच के दायरे में

चार्जशीट में कुछ डॉक्टरों के नाम भी सामने आए हैं, जिनमें डॉ. उमर उन नबी, डॉ. आदिल अहमद रादर और डॉ. मुजम्मिल शकील शामिल हैं। आरोप है कि इस नेटवर्क को तकनीकी और सामग्री संबंधी सहायता उपलब्ध कराई गई थी।

जांच के अनुसार, एक आरोपी को हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी परिसर में भी ठहराया गया था, जहां इस साजिश से जुड़ी गतिविधियां संचालित होने का संदेह है।

जंगलों में परीक्षण और ड्रोन का इस्तेमाल

NIA के मुताबिक, आरोपियों ने जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के काजीगुंड और यूसमर्ग इलाकों के जंगलों में IED और रॉकेट आधारित उपकरणों का परीक्षण किया। बाद में इन जगहों से विस्फोटक अवशेष भी बरामद किए गए।

एजेंसी ने यह भी दावा किया है कि हमले की योजना के तहत दो ड्रोन तैयार किए गए थे, जिनमें विस्फोटक लगाने की तैयारी थी, ताकि सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया जा सके।

ऑनलाइन ऑर्डर से जुटाए गए उपकरण

चार्जशीट में कहा गया है कि दिसंबर 2023 से जनवरी 2024 के बीच इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की खरीद ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए की गई। इनमें सेंसर, ट्रिगर सिस्टम और अन्य तकनीकी उपकरण शामिल थे, जिनका इस्तेमाल IED तैयार करने में किया गया।

TATP विस्फोटक का इस्तेमाल

NIA का कहना है कि ब्लास्ट में TATP (ट्राई एसीटोन ट्राई पेरॉक्साइड) जैसे अत्यंत संवेदनशील विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया, जिसे विभिन्न रसायनों से मिलाकर तैयार किया गया था।

एजेंसी के अनुसार, यह पूरा मॉड्यूल AQIS और AGuH की विचारधारा से प्रेरित था और देश में बड़े आतंकी हमलों की साजिश रच रहा था।