भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया है। यह दावा राज्य सरकार में मंत्री राकेश सिंह की ओर से किया गया है। 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले इस फैसले ने राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी ने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पर आपत्ति दर्ज कराई थी। भाजपा नेताओं कैलाश विजयवर्गीय और मंत्री राकेश सिंह ने आरोप लगाया कि नामांकन पत्र में तेलंगाना में दर्ज एक मामले की जानकारी को छिपाया गया है। इस आधार पर रिटर्निंग ऑफिसर ने उनका नामांकन अमान्य कर दिया।

नामांकन रद्द होने के बाद भाजपा उम्मीदवार महेश केवट की स्थिति मजबूत मानी जा रही है। वहीं, भाजपा की ओर से इसे “सत्य की जीत” बताया गया है। दूसरी ओर कांग्रेस ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे राजनीतिक दबाव में लिया गया निर्णय बताया है।

कांग्रेस का कहना है कि यह कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास किया गया है। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि राज्यसभा चुनाव में सत्ता पक्ष द्वारा दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।

इस बीच, कांग्रेस ने अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए उन्हें भोपाल से कर्नाटक के बेंगलुरु भेजने का फैसला किया था। यह कदम क्रॉस वोटिंग की आशंका और विधायकों की सुरक्षा को देखते हुए रणनीति के तौर पर उठाया गया था।

मीनाक्षी नटराजन कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मानी जाती हैं और राहुल गांधी की करीबी सहयोगी रही हैं। वे पहले 2009 में मंदसौर लोकसभा सीट से सांसद रह चुकी हैं, हालांकि 2019 और 2024 के चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।