देहरादून। साइबर अपराधियों ने 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर तीन करोड़ नौ लाख रुपये का भारी नुकसान पहुंचाया। महिला ने ठगों की मांग पूरी करने के लिए अपनी एफडी तोड़ी, गहने गिरवी रखे और शेयर बेचने तक को मजबूर हो गई। पीड़िता की शिकायत पर साइबर थाना में शुक्रवार को मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
महिला ने पुलिस को बताया कि उन्हें 1 सितंबर 2025 को एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को सीबीआई अधिकारी प्रदीप मिश्रा बताया। इसके बाद एक अन्य व्यक्ति ने संपर्क किया और खुद को आईपीएस अधिकारी सुनील कुमार गौतम बताया। आरोपियों ने महिला को डराया कि उसका मोबाइल नंबर मनी लॉन्ड्रिंग के 68 करोड़ रुपये के मामले से जुड़ा है और उनके खाते में 68 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए हैं। उन्हें धमकी दी गई कि अगर वह सहयोग नहीं करेंगी तो उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जाएगा और उनके बच्चों को भी कानूनी कार्रवाई झेलनी पड़ेगी।
ठगों ने व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए पुलिस वर्दी और थाने जैसी पृष्ठभूमि दिखाकर माहौल को और डरावना बना दिया। महिला को हर घंटे ‘सेफ एट होम’ संदेश भेजने, लाइव लोकेशन साझा करने, परिवार से बात न करने और चैट लॉक करने के निर्देश दिए गए। साथ ही रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का फर्जी दस्तावेज दिखाकर कहा गया कि जांच पूरी होने पर पैसा वापस मिल जाएगा।
महिला ने पुलिस को बताया कि डर के कारण उन्होंने अलग-अलग बैंकों से कुल तीन करोड़ नौ लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। पैसे जुटाने के लिए उन्होंने अपनी एफडी तोड़ी, गोल्ड लोन लिया और शेयर बेच दिए। आरोपियों ने अलग-अलग मोबाइल नंबरों से संपर्क रखा, जिनमें से कुछ अभी भी सक्रिय हैं। महिला ने पुलिस से अपील की है कि सभी संदिग्ध खातों को तुरंत फ्रीज किया जाए और उनका पैसा लौटाया जाए।
एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने कहा कि इस मामले में कॉल डिटेल, आईपी लॉग और बैंक खातों की जांच की जा रही है। पीड़िता ने बताया कि इस धोखाधड़ी के जाल में वह करीब 60 दिन तक फंसी रही। पहली बार 9 सितंबर को उन्होंने 27 लाख रुपये ट्रांसफर किए। इसके बाद लगातार दो महीने तक पैसे भेजे गए और 30 अक्टूबर को अंतिम बार 2.45 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए। इस तरह साइबर ठगों ने कुल 3.09 करोड़ रुपये की ठगी की।