स्मार्टफोन इंडस्ट्री में पिछले कुछ समय से लगातार कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। 2026 में कई बड़ी मोबाइल कंपनियों ने अपने हैंडसेट्स की कीमतों में इजाफा किया है, जिससे बजट से लेकर फ्लैगशिप सेगमेंट तक के फोन पहले की तुलना में काफी महंगे हो गए हैं। Oppo, Realme, OnePlus और Samsung जैसे प्रमुख ब्रांड्स ने भी अपने कई मॉडल्स की कीमतें बढ़ाई हैं।
हालांकि महंगाई (Inflation) को इसकी एक वजह माना जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक इसके पीछे और भी कई अहम कारण जिम्मेदार हैं। उदाहरण के लिए Realme C71 को जहां पहले 7,699 रुपये में लॉन्च किया गया था, वहीं कीमत बढ़ने के बाद यह अब करीब 11,999 रुपये तक पहुंच गया है।
AI और नए प्रोसेसर बना रहे फोन को महंगा
आज के समय में MediaTek और Qualcomm जैसी चिपसेट कंपनियां AI, गेमिंग और मल्टीटास्किंग को ध्यान में रखते हुए लगातार नए और एडवांस प्रोसेसर तैयार कर रही हैं। इन आधुनिक चिप्स का निर्माण पुराने 4G प्रोसेसर की तुलना में कहीं ज्यादा महंगा होता है, जिसका सीधा असर स्मार्टफोन की कीमत पर पड़ता है।
AI फीचर्स की बढ़ती लागत
Apple, Samsung, Google, Xiaomi जैसे ब्रांड्स अब AI आधारित फीचर्स पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं। इनमें AI फोटो एडिटिंग, लाइव ट्रांसलेशन, स्मार्ट असिस्टेंट और AI सर्च समरी जैसे फीचर्स शामिल हैं। इन सुविधाओं को सपोर्ट करने के लिए हाई-एंड हार्डवेयर की जरूरत होती है, जिससे प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ जाती है।
5G टेक्नोलॉजी भी है बड़ा कारण
4G की तुलना में 5G स्मार्टफोन्स में एडवांस्ड मॉडेम, बेहतर एंटीना सिस्टम, मजबूत कूलिंग और बड़ी बैटरी की जरूरत होती है। इन सभी तकनीकी बदलावों के चलते डिवाइस की निर्माण लागत बढ़ जाती है, जिसका असर कीमतों पर साफ दिखाई देता है।
कैमरा और डिस्प्ले भी बढ़ा रहे कीमत
आज के यूजर्स स्मार्टफोन में बेहतर कैमरा, AMOLED डिस्प्ले, हाई रिफ्रेश रेट और OIS जैसे फीचर्स की उम्मीद करते हैं। इन प्रीमियम फीचर्स को शामिल करने के लिए महंगे कंपोनेंट्स का इस्तेमाल होता है, जिससे फोन की कुल कीमत और बढ़ जाती है।
सप्लाई चेन और इंपोर्ट कॉस्ट का असर
ग्लोबल सप्लाई चेन में आई बाधाओं के कारण सेमीकंडक्टर, कच्चे माल और अन्य कंपोनेंट्स की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। चीन, ताइवान और साउथ कोरिया जैसे देशों से आने वाले हाई-क्वालिटी पार्ट्स भी महंगे हो गए हैं, जिसका सीधा असर मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट पर पड़ रहा है।
लंबा सॉफ्टवेयर सपोर्ट भी बन रहा वजह
अब कंपनियां अपने स्मार्टफोन्स के लिए 3 से 7 साल तक सॉफ्टवेयर अपडेट देने का वादा कर रही हैं। लंबे समय तक OS और सिक्योरिटी अपडेट देने के लिए कंपनियों को बड़ी इंजीनियरिंग टीम और लगातार निवेश की जरूरत होती है, जिसकी लागत भी अंततः उपभोक्ताओं पर पड़ती है।