मुजफ्फरनगर। वाराणसी के चर्चित ज्ञानवापी मामले में पहला फैसला देने और बरेली में वर्ष 2010 के दंगा मामले में आइएमसी प्रमुख तौकीर रजा को अदालत में पेश होने का आदेश देकर सुर्खियों में आए न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर अब मुजफ्फरनगर में सेवाएं देंगे। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उन्हें चित्रकूट से स्थानांतरित करते हुए मुजफ्फरनगर भेजा है, जहाँ उन्हें अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट–III) के पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
24 नवंबर को जारी स्थानांतरण आदेश के बाद न्यायाधीश दिवाकर शनिवार को मुजफ्फरनगर पहुँचे और कार्यभार ग्रहण किया। अपने न्यायिक करियर में उन्होंने वाराणसी, बरेली और चित्रकूट जैसे महत्वपूर्ण जिलों में काम किया है।
बरेली में कई महत्वपूर्ण फैसले
बरेली में 2024 की तैनाती के दौरान उन्होंने 2010 के सांप्रदायिक दंगे से जुड़े मामले में तौकीर रजा को तलब कर बड़ा कदम उठाया था। अपने कार्यकाल में उन्होंने 13 दोषियों को फांसी और 60 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई, जिसके बाद वे एक सख्त और निष्पक्ष न्यायाधीश के रूप में पहचाने जाने लगे।
ज्ञानवापी सुनवाई के बाद बढ़ानी पड़ी सुरक्षा
वाराणसी में ज्ञानवापी विवाद की सुनवाई के समय उन्हें आतंकियों की ओर से धमकियाँ मिली थीं। इस खतरे को देखते हुए हाई कोर्ट ने नवंबर 2022 में उनके और उनके परिवार के लिए सुरक्षा गारद उपलब्ध कराई थी।
मुजफ्फरनगर तबादले के बाद भी उन्होंने एडीजी मेरठ जोन से सुरक्षा व्यवस्था जारी रखने की मांग की है।
आतंकियों की धमकी ने बढ़ाई थी चिंता
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 25 अक्टूबर को ISIS से जुड़े दो संदिग्ध अदनान खां और मोहम्मद अदनान को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में पता चला कि अदनान खां ने इंस्टाग्राम पर न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर की तस्वीर पर ‘काफिर’ लिखकर धमकी दी थी।
यही नहीं, 2022 में अज्ञात लोगों पर भी मुकदमा दर्ज हुआ था, जिन्होंने ज्ञानवापी सुनवाई के दौरान उन्हें ‘काफिर’, ‘बुतपरस्त’ और ‘हिंदू जज’ जैसे अपमानजनक शब्दों से संबोधित किया था।