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संस्थापक संपादक : स्व.राजरूप सिंह वर्मा,
संपादक : गोविंद वर्मा
ग्राम्य अंचलों में राष्ट्रीय चेतना उत्पन्न करने तथा स्वराज प्राप्ति के संदेश को गांव-गांव तक पहुंचाने के उद्देश्य से सन् 1936 में देहात समाचार पत्र की स्थापना हुई। इसमें देहात के प्रसार-प्रचार और विस्तार में चौधरी शेरसिंह (संस्थापक राजा महेन्द्रप्रताप प्रेम विद्यालय नारसन), चौधरी बलवंत सिंह (पूर्व अध्यक्ष जिला बोर्ड एवं पूर्व विधायक), श्री आर.डी विद्यार्थी एडवोकेट, पूर्व उप मुख्यमंत्री चौधरी नारायण सिंह, पूर्व राज्यपाल श्री वीरेन्द्र वर्मा आदि विशिष्ट जनों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

देहात के संपादन का उत्तरदायित्व स्वर्गीय राजरूप सिंह वर्मा ने निभाया। आरंभ में देहात उर्दू साप्ताहिक के रूप में प्रकाशित हुआ। सन् 1952 के पश्चात ‘देहात’ उर्दू हिन्दी साप्ताहिक के रूप में प्रकाशित होने लगा। तट पश्चात हिंदी भाषी पाठकों की बढ़ती मांग पर समाचार पत्र देवनागरी लिपि में प्रकाशित किया जाने लगा। समय की आवश्यकता और जनता की मांग के अनुरूप ‘दैनिक देहात’ के रूप में जनपद  के एकमात्र दैनिक समाचार पत्र का प्रकाशन सन् 1965 से आरंभ हुआ यह पश्चिमी उत्तरप्रदेश का एकमात्र समाचार पत्र है जिसके प्रेस में सबसे पहले वेब ऑफसेट प्रिंटिंग मशीन लगाई गई। अपनी लोकप्रियता और प्रसार संख्या के कारण दैनिक देहात उत्तरप्रदेश के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, उत्तरप्रदेश राज्य विद्युत परिषद, राज्य भूमि विकास बैंक भारत सरकार के विज्ञापन एवं दृश्य प्रचार निदेशालय (डीएवीपी), सभी सरकारी प्राधिकरणों एवं स्थानीय निकाय तथा न्यायालयों के विज्ञापन दैनिक देहात को नियमित रूप से प्राप्त होते रहे। इनके अतिरिक्त जीवन बीमा निगम इफको, एटलस,निरमा आदि विज्ञापनदाता देहात में विज्ञापन प्रेषित करते रहे। साथ ही उर्वरकों, कीटनाशकों, कृषि यंत्रों एवं उपभोक्ता वस्तुओं के उत्पादक व विक्रेता देहात की पहली पसंद रहे। देहात की पहुंच अपने त्वरित समाचारों एवं निष्पक्ष विचारों के कारण ग्रामांचल के किसान मजदूर से लेकर विद्यार्थियों, व्यापारियों, और शहर के प्रबुद्ध वर्ग तक है।