देशभर में शुक्रवार से छठ महापर्व शुरू हो जाएगा, इसको लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। दिल्ली में घाटों की सफाई से लेकर कृत्रिम घाट बनाने तक का काम शुरू हो गया है। दो साल बाद एनजीटी ने यमुना किनारे छठ मनाने की इजाजत दी है। लेकिन यमुना में सफेद बर्फ सी बहती झाग दिखाई दे रही है, जिसको लेकर जानकार चितिंत हैं। दरअसल यह सफेद झाग जहरीला होता है और इससे कई तरह की बीमारी होने का खतरा है।  

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समाचार एजेंसी एएनआई ने एक वीडियो ट्वीट किया है, इसमें साफ नजर आ रहा है कि कालिंदी कुंज से गुजरती यमुना में चारों ओर सफेद जहरीला झाग बह रहा है। बता दें कि यहां छठ के दौरान काफी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। महिलाएं व पुरुष बड़ी संख्या में यमुना के पानी में खड़े होते हैं, ये विषैला पानी उन सभी के लिए खतरनाक साबित हो सकता है जो इसके संपर्क में आएगा। 

यमुना किनारे केवल चुनिंदा घाटों मनाया जाएगा छठ
एनजीटी के आदेश का पालन करते हुए यमुना के तय घाटों पर ही छठ पर्व मनाया जाएगा। उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने यमुना के चुनिंदा घाटों पर छठ पर्व के आयोजन के लिए मंजूरी दी है। उन्होंने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से छठ पर्व के मौके पर व्रतियों के लिए घाटों पर स्वच्छ पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। एलजी ने मुख्यमंत्री को तयशुदा वक्त से पहले सभी घाटों पर पहले की तरह छठ मनाने के बयान को भ्रामक बताते हुए उन्हें ऐसे बयानों से बचने की सलाह दी है।

एलजी की ओर से छठ पूजा के आयोजन के लिए विशिष्ट घाटों पर करने की मंजूरी दी गई है। एलजी ने कहा कि 21 अक्तूबर को अरविंद केजरीवाल की ओर से किए गए ट्वीट से भ्रम की स्थिति पैदा हुई। मुख्यमंत्री की ओर से किए ट्वीट में कहा गया कि यमुना के किनारे कहीं भी पूजा हो सकती है, इससे लोगों में संशय है। उपराज्यपाल ने राजस्व और पर्यावरण विभाग को यमुना को प्रदूषित होने से बचाने के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेशों को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है। एलजी ने कहा कि यमुना के केवल निर्दिष्ट घाटों पर पूजा की अनुमति दी गई है।मुख्यमंत्री के बयान को बताया भ्रामक
उपराज्यपाल ने छठ पर्व के मौके पर यमुना के निदिष्ट घाटों की साफ सफाई और स्वच्छ पानी सहित आयोजन के लिए सभी इंतजामों को पुख्ता करने का विभागों को निर्देश दिया है। सभी घाटों पर पहले की तरफ छठ पूजा के आयोजन के मुख्यमंत्री के बयान को अपरिपक्व और भ्रामक बताते हुए कहा कि इससे जनहित से जुड़े संवेदनशील मामले भी प्रभावित हो सकते हैं। भविष्य में ऐसे बयान से बचने की मुख्यमंत्री को एलजी ने सलाह दी है।