संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार, 1 दिसंबर से शुरू होकर 19 दिसंबर तक चलेगा। इस बार के सत्र में हंगामे की संभावना बढ़ी हुई है, खासकर विशेष मतदाता पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर। विपक्ष सत्ता पक्ष पर इस प्रक्रिया के खिलाफ दबाव बनाने की रणनीति तैयार कर रहा है और संसद के भीतर और बाहर विरोध प्रदर्शन की संभावना है।

सरकार की ओर से इस सत्र में परमाणु ऊर्जा विधेयक समेत कुल दस विधेयक पेश किए जा सकते हैं। हाल ही में एसआईआर प्रक्रिया के बाद बिहार चुनाव में एनडीए को बड़ी जीत मिली थी, जबकि विपक्षी महागठबंधन को नुकसान झेलना पड़ा। राहुल गांधी और तेजस्वी यादव एसआईआर के खिलाफ लगातार आक्रामक रुख बनाए हुए हैं। पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस भी इस मामले में सक्रिय है और चुनाव आयोग को घेरने का प्रयास कर रही है।

सत्र से पहले हुई सर्वदलीय बैठक में सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, जेपी नड्डा और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शामिल हुए, जबकि विपक्ष की ओर से कांग्रेस के प्रमोद तिवारी और डेरेक ओ’ब्रायन समेत अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। बैठक में विपक्ष ने एसआईआर पर चर्चा की मांग की।

सत्र के दौरान जिहाद विवाद भी हंगामे का कारण बन सकता है। जमीयत उलमा-ए-हिंद के नेता मौलाना महमूद मदनी के हालिया बयान ने राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है। उन्होंने ‘जब-जब जुल्म होगा, तब-तब जिहाद होगा’ और ‘वंदे मातरम के सामने नहीं झुकने’ जैसे बयानों के जरिए विवाद बढ़ाया। इस पर सरकार संसद में विपक्ष को घेरने की रणनीति अपना सकती है।