अनुगुल। उड़ीसा उच्च न्यायालय के आदेश के बाद राज्य सरकार ने सोमवार को पुष्टि की कि श्री जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार का विस्तृत इन्वेंट्री काम जल्द शुरू किया जाएगा। सरकार ने कहा कि इस सूची के तैयार होने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

उच्च न्यायालय ने 27 जनवरी को एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह तीन माह के भीतर मंदिर के खजाने में रखे आभूषणों और अन्य कीमती वस्तुओं की पूरी सूची बनाएं। इस निर्देश के दौरान खंडपीठ में मुख्य न्यायाधीश हरीश टंडन और न्यायमूर्ति एमएस रमन मौजूद थे।

सोमवार को मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के अधिकारियों के साथ बैठक कर इन्वेंट्री की तैयारियों का जायजा लिया। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार बैठक में गिनती की प्रक्रिया, सुरक्षा प्रबंध और प्रशासनिक तैयारियों पर विस्तार से चर्चा हुई। इससे पहले कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन के आवास पर वरिष्ठ अधिकारियों की प्रारंभिक बैठक भी हुई थी। हरिचंदन ने कहा कि सूची तैयार करने की अंतिम तिथि का निर्णय मुख्यमंत्री करेंगे।

इन्वेंट्री प्रक्रिया के लिए मानक संचालन प्रक्रिया पहले ही श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति द्वारा मंजूर कर दी गई है। समिति की अध्यक्षता पुरी के गजपति महाराजा दिब्यसिंह देब कर रहे हैं।

अधिकारियों के अनुसार वर्तमान सूची को 1978 में तैयार की गई पुरानी सूची से मिलान किया जाएगा और सभी आभूषणों तथा मूल्यवान वस्तुओं का डिजिटल कैटलॉग और फोटोग्राफ तैयार किए जाएंगे।

रत्न भंडार में दो कक्ष हैं। बाहरी कक्ष रोज़मर्रा के देवपूजन के लिए खुला रहता है, जबकि आंतरिक कक्ष को 46 वर्षों बाद 14 जुलाई 2024 को संरचना की मरम्मत और इन्वेंट्री कार्य के लिए खोला गया था। आंतरिक कक्ष का संरक्षण और नवीनीकरण कार्य भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने 95 दिन और 333 घंटे में पूरा किया।

समीक्षा बैठक में उड़ीसा उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति बिश्वनाथ रथ भी उपस्थित थे, जो रत्न भंडार के उद्घाटन, मरम्मत और सूचीकरण के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति के अध्यक्ष हैं।

वहीं, विपक्षी दल बीजेडी के प्रवक्ता लेनिन मोहंती ने भाजपा सरकार पर इस मामले में राजनीति करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि सरकार को इन्वेंट्री के लिए उच्च न्यायालय के निर्देश का इंतजार नहीं करना चाहिए था।