इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के कर्मचारियों को जनगणना-2027 के कार्य में लगाने के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत ने इस मामले में अंतरिम आदेश जारी करते हुए विवादित निर्देश के क्रियान्वयन को अगली सुनवाई तक स्थगित कर दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने विशेष अपील पर सुनवाई करते हुए दिया।
नगर निगम के आदेश को दी गई थी चुनौती
मामले की शुरुआत 5 मई 2026 को उस आदेश से हुई, जो कानपुर नगर निगम के जोन-1 के चार्ज अधिकारी द्वारा जारी किया गया था। इस आदेश में एलआईसी कर्मचारियों को जनगणना कार्य में ड्यूटी लगाने के निर्देश दिए गए थे।
इस आदेश को नॉर्थ सेंट्रल जोन इंश्योरेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि, पहले एकल पीठ ने याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि संबंधित आदेश को सही तरीके से चुनौती नहीं दी गई है, जिसके बाद मामला विशेष अपील के जरिए खंडपीठ के समक्ष पहुंचा।
हाईकोर्ट ने अधिकार क्षेत्र पर उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने स्पष्ट टिप्पणी की कि नगर निगम के जोनल अधिकारी के पास एलआईसी कर्मचारियों को जनगणना कार्य में लगाने का अधिकार नहीं है।
अदालत ने कहा कि यह आदेश जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 7 के प्रावधानों के अनुरूप नहीं प्रतीत होता और यह वर्ष 2011 के हाईकोर्ट के पूर्व निर्णय के भी विपरीत है।
‘संस्थान के भीतर ही सीमित हो सकती है ड्यूटी’
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी प्रतिष्ठान, फैक्ट्री या संस्था के कर्मचारियों से जनगणना कार्य में सहयोग लिया जा सकता है, लेकिन यह कार्य आमतौर पर संबंधित परिसर तक ही सीमित होना चाहिए।
अदालत ने यह भी कहा कि केवल जनगणना जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्य का हवाला देकर किसी भी प्रशासनिक आदेश को वैध नहीं ठहराया जा सकता, बल्कि उसे कानून के दायरे में होना जरूरी है।
अगली सुनवाई जुलाई में
अदालत ने आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई 2026 को निर्धारित की है। तब तक 5 मई 2026 के आदेश का प्रभाव स्थगित रहेगा।