मुजफ्फरनगर में विधानसभा चुनाव की तैयारी अब तेज़ हो गई है और दावेदार जनता की उम्मीदों और नब्ज़ पर नजर बनाए हुए हैं। राजनीतिक परिवारों में सीटों के बंटवारे को लेकर भी चर्चा जोरों पर है, खासकर बड़े और छोटे भाईयों के बीच।
सपा सांसद हरेंद्र मलिक के परिवार में बड़े बेटे पंकज मलिक ने तीन बार विधायक बनकर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की है। अब छोटे बेटे निशांत मलिक की राजनीति में एंट्री को लेकर अटकलें तेज हैं। खबर है कि निशांत को बुढ़ाना सीट से पहली बार चुनावी मैदान में उतारा जा सकता है, जबकि 2029 में पंकज मलिक की लोकसभा की संभावित दावेदारी पर भी चर्चा हो रही है। हालांकि, परिवार ने अभी तक अंतिम फैसला नहीं किया है।
वहीं, राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल के परिवार में भी हलचल है। उनके भाई ललित अग्रवाल अपने व्यवसाय में सक्रिय हैं, जबकि उनके भांजे को भाजपा संगठन में जिम्मेदारी मिली है। पूर्व मंत्री योगराज सिंह के भाई लेखराज सिंह ने राजनीति को अपने भट्ठा उद्योग तक सीमित रखा है। कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार के ममेरे भाई गौरव (मोनू) भी राजनीतिक गतिविधियों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं।
पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान के भाई विवेक बालियान मोदीपुरम की सरदार वल्लभ भाई पटेल यूनिवर्सिटी में शिक्षक हैं और स्थानीय सामाजिक कार्यक्रमों में सक्रिय रहते हैं। ऐसे में उनका नाम भी विधानसभा टिकट की चर्चाओं में आता रहता है।
रालोद के बिजनौर सांसद चंदन चौहान के लिए मीरापुर सीट की दावेदारी में पत्नी यशिका और भाई सिद्धार्थ में से किसी एक का चयन करना चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
पश्चिम यूपी की सियासी पृष्ठभूमि में परिवारों के भीतर टिकट को लेकर पहले भी टकराव देखने को मिल चुका है। छह दशक से सक्रिय स्वरूप परिवार में पूर्व मंत्री चितरंजन स्वरूप के बेटे सौरभ स्वरूप बंटी को 2022 में सपा-रालोद गठबंधन ने शहर सीट से उम्मीदवार बनाया था। इससे नाराज उनके भाई गौरव स्वरूप भाजपा में शामिल हो गए थे। इसी परिवार के विष्णु स्वरूप 1967 में निर्दलीय विधायक बने थे, जबकि उनके भाई चितरंजन स्वरूप 1974 में कांग्रेस से विधायक बने थे।
बसपा से जुड़े कादिर राना ने 2009 में सांसद बनने के बाद अपने भाई नूर सलीम राना को राजनीति में बढ़ावा दिया। नूर सलीम 2012 में चरथावल विधानसभा से विधायक बने, 2017 में चुनाव हारे और 2022 में टिकट नहीं मिला। वर्तमान में नूर सलीम रालोद में सक्रिय हैं, जबकि कादिर राना सपा में सक्रिय हैं।