अयोध्या राम मंदिर में कम हुआ चढ़ावा, श्रद्धालुओं की संख्या में भी गिरावट

HIGHLIGHTS
- अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान राशि से जुड़े कथित गड़बड़ी मामले की जांच के बीच श्रद्धालुओं की संख्या और दान संग्रह में गिरावट की बात सामने आ रही है।
- मंदिर से जुड़े सूत्रों के अनुसार, जहां पहले हर महीने औसतन लगभग सात करोड़ रुपये का दान प्राप्त होता था, वहीं पिछले करीब दो हफ्तों में यह घटकर लगभग डेढ़ करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
- जांच और विवाद का असर दान राशि में कथित अनियमितताओं को लेकर एसआईटी जांच शुरू होने के बाद मंदिर व्यवस्था को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
- हालांकि श्रीरा…
अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान राशि से जुड़े कथित गड़बड़ी मामले की जांच के बीच श्रद्धालुओं की संख्या और दान संग्रह में गिरावट की बात सामने आ रही है। मंदिर से जुड़े सूत्रों के अनुसार, जहां पहले हर महीने औसतन लगभग सात करोड़ रुपये का दान प्राप्त होता था, वहीं पिछले करीब दो हफ्तों में यह घटकर लगभग डेढ़ करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
जांच और विवाद का असर
दान राशि में कथित अनियमितताओं को लेकर एसआईटी जांच शुरू होने के बाद मंदिर व्यवस्था को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। हालांकि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि दान संग्रह की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और सुरक्षित है।
इसके बावजूद, इस मामले को लेकर उठे सवालों के चलते श्रद्धालुओं के एक हिस्से में असमंजस की स्थिति बनने की चर्चा है, जिसका असर दान और दर्शन संख्या पर दिखने की बात कही जा रही है।
श्रद्धालुओं की संख्या में भी गिरावट
सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भी कमी देखी गई है। जहां कुछ समय पहले प्रतिदिन करीब एक लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे थे, वहीं अब यह आंकड़ा घटकर लगभग 75 हजार के आसपास बताया जा रहा है।
इसके साथ ही दानपात्रों में प्रतिदिन आने वाली राशि भी कम होकर करीब सात से आठ लाख रुपये प्रतिदिन रह गई है।
प्रशासनिक कारण भी संभव
मंदिर प्रबंधन से जुड़े कुछ लोगों का कहना है कि दान और भीड़ में आई कमी का कारण केवल विवाद ही नहीं है। भीषण गर्मी, स्कूल-कॉलेजों का खुलना, विवाह सीजन का खत्म होना और सामान्य यात्रा चक्र में बदलाव भी इस गिरावट की वजह हो सकते हैं।
फिलहाल मंदिर परिसर में स्थिति सामान्य बताई जा रही है, जबकि दान व्यवस्था और श्रद्धालुओं की संख्या पर नजर रखी जा रही है।
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