सीएम योगी के अयोध्या दौरे के दौरान हेलीपैड के पास लगी आग, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

अयोध्या में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरे के दौरान राम कथा पार्क स्थित हेलीपैड के पास अचानक आग लगने की घटना सामने आई, जिससे सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। शुक्रवार दोपहर करीब 2:40 बजे मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर चौधरी चरण सिंह घाट के पास बने हेलीपैड पर सुरक्षित उतर चुका था और वे सरयू अतिथि गृह की ओर रवाना हो चुके थे। इसी दौरान हेलीपैड के आसपास की सूखी झाड़ियों में आग भड़क गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हेलीकॉप्टर की लैंडिंग से पहले किए गए स्मोक सिग्नल और तेज हवा के कारण चिंगारियां आसपास की सूखी घास तक पहुंच गईं, जिससे आग तेजी से फैल गई। कुछ ही देर में आग ने करीब 15 मीटर के दायरे को अपनी चपेट में ले लिया।
घटना के बाद स्थानीय स्तर पर शुरुआती प्रयास किए गए और फिर फायर ब्रिगेड की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। जेट्टी क्रूज लाइन के गार्ड अमित तिवारी ने भी राहत कार्य में सहयोग करते हुए पानी की मोटर और पाइप उपलब्ध कराए, जिससे आग पर तेजी से काबू पाया जा सका। अग्निशमन विभाग और सुरक्षा कर्मियों की संयुक्त कार्रवाई से स्थिति नियंत्रण में आ गई।
सीओ अयोध्या आशुतोष तिवारी ने बताया कि फायर ब्रिगेड पहले से ही मौके पर मौजूद थी, जिससे आग को फैलने से पहले ही नियंत्रित कर लिया गया। हालांकि, मुख्यमंत्री के कार्यक्रम स्थल के इतने करीब आग लगने की घटना ने सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सीएम दौरे के दौरान चार घंटे प्रभावित रहा यातायात
मुख्यमंत्री के दौरे के कारण अयोध्या में यातायात व्यवस्था भी प्रभावित रही। सुरक्षा कारणों से दोपहर करीब 3 बजे से शाम 6 बजे तक कई प्रमुख मार्गों पर आवागमन पूरी तरह या आंशिक रूप से बंद रहा।
इस दौरान काशीराम कॉलोनी और आसपास के क्षेत्रों में लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थानीय निवासी, श्रद्धालु और ई-रिक्शा चालक तेज धूप में रास्ता खुलने का इंतजार करते रहे या फिर वैकल्पिक लंबे मार्गों से होकर अपने गंतव्य तक पहुंचे।
सीएम का शाम 5 बजे काशीराम कॉलोनी स्थित रामायण वैक्स म्यूजियम पहुंचने का कार्यक्रम था, जिसके चलते मुख्य मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई थी। इसका सीधा असर रोजाना यात्रा करने वाले लोगों और श्रद्धालुओं पर पड़ा।
ई-रिक्शा चालकों को वैकल्पिक मार्गों से होकर गुजरना पड़ा, जिससे यात्रियों का समय और किराया दोनों बढ़ गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पहले से बेहतर सूचना और वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था की जाती, तो असुविधा को काफी हद तक कम किया जा सकता था।
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