NDA पासिंग आउट परेड में सेना प्रमुख का संदेश, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से लें प्रेरणा

पुणे के खडकवासला स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) में 150वें कोर्स की पासिंग आउट परेड का भव्य आयोजन किया गया। इस मौके पर थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने परेड की समीक्षा की और युवा कैडेट्स को भविष्य की जिम्मेदारियों के लिए प्रेरित किया।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ से मिली सीख का जिक्र
अपने संबोधन में जनरल द्विवेदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित किया है कि जब राष्ट्र की इच्छाशक्ति सटीक रणनीति और दृढ़ संकल्प के साथ सामने आती है, तो किसी भी उकसावे का प्रभावी जवाब दिया जा सकता है। उन्होंने इसे भारतीय सैन्य प्रतिक्रिया का एक नया मानक बताया, जिसे आगे बनाए रखना नई पीढ़ी के अधिकारियों की जिम्मेदारी है।
बदलते सुरक्षा परिदृश्य पर चेतावनी
सेना प्रमुख ने कहा कि आज वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। खतरे अब पारंपरिक युद्धों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ग्रे-जोन संघर्ष और हाइब्रिड वारफेयर जैसे नए स्वरूप में सामने आ रहे हैं। ऐसे हालात में सैनिकों को तेज निर्णय क्षमता और रणनीतिक सोच के साथ काम करना होगा।
तीनों सेनाओं की संयुक्तता पर जोर
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तीनों सेनाओं की संयुक्त और समन्वित कार्रवाई एनडीए की उस नींव का परिणाम है, जो शुरुआत से ही एकता और समन्वय पर आधारित रहती है। भविष्य में भी सभी कैडेट्स को मिलकर देश सेवा करने की भावना के साथ आगे बढ़ना होगा।
अपने अनुभव किए साझा, भावुक हुए सेना प्रमुख
जनरल द्विवेदी ने इस अवसर को व्यक्तिगत रूप से भावुक बताते हुए कहा कि वे स्वयं 42 वर्ष पहले इसी अकादमी से पास आउट हुए थे। उन्होंने कहा कि जिस जगह से एक सैन्य यात्रा की शुरुआत होती है, वह जीवनभर याद रहती है और उसका प्रभाव हमेशा बना रहता है।
कैडेट्स और विदेशी प्रतिभागियों की सराहना
सेना प्रमुख ने परेड में कैडेट्स के अनुशासन और प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने चीता स्क्वाड्रन को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए विशेष रूप से बधाई दी।
इसके साथ ही उन्होंने 12 मित्र देशों से आए 24 विदेशी कैडेट्स का भी उल्लेख किया और कहा कि भले ही वे अलग-अलग देशों से आए हों, लेकिन वे एक समान प्रशिक्षण और साझा मूल्यों के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
युवा अधिकारियों के लिए संदेश
कार्यक्रम के अंत में जनरल द्विवेदी ने कहा कि यह परेड केवल एक समापन नहीं बल्कि एक नई शुरुआत है। उन्होंने कैडेट्स को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने और ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने का संदेश दिया।
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