राम मंदिर दान विवाद पर स्वामी अवधेशानंद गिरी का बड़ा बयान, बोले- जवाबदेही तय होना जरूरी

HIGHLIGHTS
- स्वामी अवधेशानंद गिरी ने राम मंदिर दान विवाद को श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की।
- उन्होंने कहा कि केवल आरोपियों ही नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की निगरानी करने वाले जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
- युवाओं को संदेश देते हुए स्वामी ने योग, संतुलित जीवनशैली और यथार्थवादी सोच अपनाने की सलाह दी तथा धर्म में दिखावे से बचने का आह्वान किया।
अयोध्या के राम मंदिर में दान और ट्रस्ट प्रबंधन को लेकर उठे विवाद पर जूना अखाड़े के पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह मामला सिर्फ आर्थिक अनियमितता तक सीमित नहीं है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास से जुड़ा विषय है। उनके अनुसार, यदि दान और चढ़ावे के प्रबंधन में कोई गड़बड़ी हुई है तो इसे साधारण भूल नहीं माना जा सकता।
एक विशेष बातचीत में स्वामी अवधेशानंद ने कहा कि भगवान राम के नाम पर श्रद्धालुओं ने जिस विश्वास के साथ दान दिया, उस भरोसे को ठेस पहुंचना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि केवल दोषियों की पहचान कर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि पूरी व्यवस्था की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए। जिन लोगों के जिम्मे निगरानी और प्रबंधन था, उन्हें भी अपनी भूमिका पर आत्ममंथन करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अयोध्या केवल एक धार्मिक नगरी नहीं, बल्कि सनातन परंपरा और भारतीय संस्कृति का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में राम मंदिर जैसी राष्ट्रीय आस्था से जुड़ी संस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उनका मानना है कि भविष्य में किसी भी तरह के विवाद से बचने के लिए मजबूत और स्पष्ट निगरानी तंत्र विकसित किया जाना आवश्यक है।
स्वामी अवधेशानंद ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर केंद्र सरकार को पूरे मामले की समीक्षा करनी चाहिए, क्योंकि ट्रस्ट का गठन सरकारी प्रक्रिया के तहत हुआ था। उन्होंने विश्वास जताया कि शीर्ष नेतृत्व श्रद्धालुओं के भरोसे को मजबूत करने के लिए उचित कदम उठाएगा।
धार्मिक आचरण पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि भक्ति केवल दिखावे या सोशल मीडिया पर प्रदर्शन का विषय नहीं है। तीर्थस्थलों की स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और अनुशासित व्यवहार भी धार्मिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से पवित्र स्थलों की गरिमा बनाए रखने की अपील की।
युवाओं को संदेश देते हुए स्वामी अवधेशानंद ने कहा कि आज की पीढ़ी त्वरित सफलता की अपेक्षा में अधीर होती जा रही है। उन्होंने युवाओं को योग, संतुलित जीवनशैली, पर्याप्त विश्राम और अच्छे साहित्य के अध्ययन को अपनाने की सलाह दी। उनके अनुसार, केवल सकारात्मक सोच नहीं बल्कि यथार्थवादी दृष्टिकोण ही जीवन में स्थायी सफलता का आधार बन सकता है।
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