व्हाइट हाउस में सऊदी क्राउन प्रिंस से खशोगी हत्या पर सवाल, ट्रंप ने बचाव किया

वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सात साल बाद व्हाइट हाउस आए सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का भव्य स्वागत किया। यह उनकी पहली आधिकारिक यात्रा है, जो 2018 में पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या के बाद हो रही है। खशोगी मामले को लेकर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन ट्रंप ने रिपोर्टों में क्राउन प्रिंस की भूमिका के संकेत मिलने के बावजूद उन्हें पूरी तरह से बचाया और कहा कि यह सिर्फ एक गलती थी।
ट्रंप ने कहा, "चाहे आप उन्हें पसंद करें या न करें, जो हुआ वह हो चुका है। क्राउन प्रिंस को इसकी कोई जानकारी नहीं थी। मीडिया को ऐसे सवाल पूछने की जरूरत नहीं है जो मेहमान को शर्मिंदा करें।"
अरबों डॉलर के निवेश और रक्षा सौदे
दोनों देशों ने इस दौरान अरबों डॉलर के निवेश, रक्षा सौदों और मध्य पूर्व में रणनीतिक साझेदारी को लेकर अहम घोषणा की। क्राउन प्रिंस ने कहा कि सऊदी अरब अमेरिका में अपने निवेश को एक ट्रिलियन डॉलर तक बढ़ाएगा। इसके जवाब में ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिका सऊदी अरब को F-35 लड़ाकू विमान बेचेगा। साथ ही दोनों देशों ने बड़े निवेश सम्मेलन की योजना बनाई है, जिसमें प्रमुख कंपनियों जैसे सेल्सफोर्स, फाइजर, क्वालकॉम और अरामको के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
खशोगी हत्या मामला और सऊदी प्रतिक्रिया
2018 में सऊदी पत्रकार जमाल खशोगी इस्तांबुल स्थित सऊदी वाणिज्य दूतावास गए थे, जहां उनकी हत्या कर दी गई। खशोगी सऊदी शासन के आलोचक थे और वॉशिंगटन पोस्ट में लिखते थे। तुर्की और अमेरिकी जांच में पाया गया कि सऊदी एजेंटों की टीम ने दूतावास में उनकी हत्या की। अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में यह संकेत मिला कि ऑपरेशन की मंजूरी क्राउन प्रिंस मोहम्मद ने दी थी। सऊदी अरब ने आरोपों का खंडन किया और मामले को "दर्दनाक गलती" बताया।
इस्राइल–सऊदी संबंध और कूटनीतिक मुद्दे
क्राउन प्रिंस ने कहा कि सऊदी अरब अब्राहम समझौते का हिस्सा बनना चाहता है, लेकिन फलस्तीन के लिए दो-राष्ट्र समाधान का स्पष्ट मार्ग पहले चाहिए। दोनों देश एआई निवेश, नागरिक परमाणु ऊर्जा और नई तकनीकी साझेदारी पर भी काम कर रहे हैं।
मानवाधिकार समूहों की आलोचना
इसी बीच, 11 मानवाधिकार संगठनों ने ट्रंप प्रशासन से अपील की कि वह सऊदी अरब पर मानवाधिकार सुधारों का दबाव बढ़ाए। उनकी मांग है कि आलोचकों, पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की हिरासत और फांसी की घटनाओं पर ध्यान दिया जाए। ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा कि केवल फोटो खिंचवाना पर्याप्त नहीं है, वास्तविक बदलाव की जरूरत है।
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