सुरक्षा बलों और पुनर्वास नीतियों का असर, छत्तीसगढ़ में नक्सलियों का सामूहिक आत्मसमर्पण

छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के आत्मसमर्पण की खबरें सामने आ रही हैं। कांकेर जिले के कोयलीबेडा थाना क्षेत्र में करीब 100 से ज्यादा नक्सलियों ने सुरक्षा बलों के सामने हथियार डालकर आत्मसमर्पण किया। फिलहाल इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जानकारी के अनुसार, नक्सली कामतेड़ा बीएसएफ कैंप तक पैदल आए और वहां बसों में बैठकर पहुंचे। इसमें रावघाट एरिया कमेटी के प्रमुख नेता राजू सलाम, मीना, प्रसाद, भास्कर समेत 100 से अधिक नक्सली शामिल थे। अधिकारियों का कहना है कि इन नक्सलियों का रिकॉर्ड खंगाला जाएगा और जल्द ही इसकी विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी। सुरक्षा कारणों से पत्रकारों को इस प्रक्रिया से दूर रखा गया।
दूसरी ओर, सुकमा जिले में भी 27 सक्रिय माओवादी नक्सलियों ने हथियार डालकर आत्मसमर्पण किया। इनमें 50 लाख रुपये के इनामी नक्सली, पीएलजीए बटालियन नंबर-1 के दो हार्डकोर सदस्य, सीपीआई (माओवादी) डिवीजन स्तर के एक कैडर और संगठनात्मक सदस्य शामिल हैं। आत्मसमर्पित माओवादी 10 महिलाएं और 17 पुरुष हैं। इनके खिलाफ अलग-अलग इनाम घोषित थे, जिसमें कुछ पर 10 लाख और कुछ पर 1-8 लाख रुपये तक के इनाम शामिल थे।
छत्तीसगढ़ पुलिस ने बताया कि लगातार चल रही “नक्सलवादी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025” और “नियद नेल्ला नार योजना” के कारण माओवादी संगठन में अव्यवस्था और असंतोष बढ़ा। इसके चलते कई नक्सलियों ने हथियार डालने का निर्णय लिया। आत्मसमर्पित सभी सदस्यों को शासन की पुनर्वास नीति के तहत सुरक्षा और आर्थिक सहायता दी जाएगी।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस मौके पर ट्वीट कर कहा कि सुकमा जिले में सक्रिय माओवादी सहित 27 नक्सलियों का आत्मसमर्पण इस बात का स्पष्ट संकेत है कि नक्सलवाद अपने अंत की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सुरक्षाबलों की मेहनत, सरकार की संवेदनशील नीतियां और वनांचल में बढ़ते विश्वास से यह परिवर्तन संभव हुआ है। यह केवल आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि राज्य की पुनर्वास नीतियों और लोगों के प्रति अपनाई गई संवेदनशील दृष्टि का परिणाम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में देश नक्सल मुक्त भारत की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
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