नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के बीच अमेरिका ने अपने बड़े सैन्य अभियान, ऑपरेशन एपिक फ्यूरी, की आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक की है। वॉशिंगटन से मिली रिपोर्ट के अनुसार, अभियान के पहले 24 घंटों में ही अमेरिकी सेना ने ईरान के 1,000 से अधिक सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर हमला किया। यह हमले हवा, समुद्र, साइबर और अंतरिक्ष क्षमताओं को मिलाकर किए गए, और इसे हाल के वर्षों के सबसे बड़े समन्वित सैन्य अभियानों में से एक बताया जा रहा है।
रणनीतिक तैयारी और शुरुआत
अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने बताया कि यह अभियान लंबे समय से बनाई जा रही रणनीति का हिस्सा था। संयुक्त प्रमुख समिति के अध्यक्ष, एयर फोर्स जनरल डैन कैन ने पेंटागन में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ऑपरेशन 28 फरवरी को शुरू हुआ। शुरुआती चरण में ही बड़े पैमाने पर हमले किए गए ताकि ईरान की जवाबी कार्रवाई की क्षमता कमजोर हो जाए।
हवा, समुद्र और जमीन से समन्वित हमला
जनरल कैन के अनुसार, ऑपरेशन में 100 से अधिक लड़ाकू और सहायक विमान शामिल थे, जिनमें फाइटर जेट, टैंकर विमान, एयरबोर्न अर्ली वार्निंग सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक अटैक प्लेटफॉर्म और ड्रोन शामिल थे। इसके अलावा लंबी दूरी के बॉम्बर विमानों और अमेरिकी नौसैनिक बलों ने समुद्र से भी लगातार हमले किए।
साइबर और अंतरिक्ष से पहले रणनीतिक हमला
अधिकारियों ने बताया कि सीधे हमले शुरू करने से पहले अमेरिकी साइबर कमांड और स्पेस कमांड ने ईरान की निगरानी और संचार प्रणाली को निशाना बनाया। इस कदम से ईरान की प्रतिक्रिया क्षमता बाधित हुई। इसके बाद जमीन और भूमिगत ठिकानों पर वास्तविक सैन्य हमले यानी काइनेटिक स्ट्राइक शुरू किए गए।
बी-2 बॉम्बर और लंबी दूरी के मिशन
अमेरिकी बी-2 स्टेल्थ बॉम्बर ने अमेरिका से उड़ान भरकर लगभग 37 घंटे का लंबा मिशन पूरा किया और गहरे भूमिगत ठिकानों पर बम गिराए। अभियान के पहले 57 घंटों में अमेरिकी बलों ने जमीन और समुद्र से सैकड़ों मिशन लॉन्च किए और हजारों गोला-बारूद का इस्तेमाल किया। विशेषज्ञों ने इसे तकनीकी और सैन्य समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।