पाकिस्तान खेल जगत में डोपिंग विवाद को लेकर फिर सुर्खियों में है। खेल मध्यस्थता न्यायालय (सीएएस) की एंटी-डोपिंग डिविजन ने पाकिस्तान भारोत्तोलन महासंघ के पूर्व अध्यक्ष हाफिज इमरान बट और कोच इरफान बट को आजीवन प्रतिबंधित कर दिया है। दोनों को यह दोषी पाया गया कि उन्होंने खिलाड़ियों और नाबालिग भारोत्तोलकों को प्रतिबंधित दवाएं दीं।

2014-2016 के मामलों की जांच

सीएएस के मुताबिक, 2014 से 2016 के बीच बट साहब ने बड़े पैमाने पर डोपिंग को बढ़ावा दिया। आरोप है कि उन्होंने खिलाड़ियों को स्टेरॉयड और अन्य प्रतिबंधित पदार्थ दिए। इस गंभीर उल्लंघन के चलते उन्हें खेल से हमेशा के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है। अब वे किसी भी अंतरराष्ट्रीय या राष्ट्रीय भारोत्तोलन गतिविधियों में भाग नहीं ले सकेंगे।

खिलाड़ी अबूबकर गनी पर चार साल का प्रतिबंध

पाकिस्तानी भारोत्तोलक अबूबकर गनी को भी चार साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है। गनी 2021 विश्व चैंपियनशिप में डोपिंग टेस्ट में फेल पाए गए थे। उनके सैंपल में टैमोक्सीफेन मेटाबोलाइट पाया गया और जांच में यह भी सामने आया कि उन्होंने फर्जी मेडिकल दस्तावेज प्रस्तुत किए, जिसे डोपिंग प्रक्रिया में छेड़छाड़ माना गया। सीएएस ने उन्हें 6 मार्च 2026 से 5 मार्च 2030 तक खेलों से प्रतिबंधित किया।

पाकिस्तान भारोत्तोलन महासंघ पर सख्त कार्रवाई की संभावना

इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय भारोत्तोलन महासंघ (IWF) ने संकेत दिए हैं कि पाकिस्तान भारोत्तोलन महासंघ पर और भी कड़ी कार्रवाई हो सकती है। पहले से ही महासंघ एक साल के निलंबन का सामना कर रहा है। अब नए मामलों के सामने आने के बाद उसकी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

इस घटनाक्रम ने खेलों में ईमानदारी और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और एंटी-डोपिंग नियमों को लागू करने की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर किया है।