पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हिंसा की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने राज्य में 500 केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती करने का निर्णय लिया है। ये बल आगामी आदेश तक राज्य में तैनात रहेंगे।

चुनाव आयोग ने यह कदम राज्य में पिछले अनुभवों को देखते हुए उठाया है। जानकारी के अनुसार, 2021 के विधानसभा चुनावों के बाद हुई हिंसा में 25 लोगों की मौत हुई थी और 800 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। वहीं, 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद भी हुई झड़पों में लगभग 7 लोगों की जान गई और करीब 700 लोग घायल हुए थे।

आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि राज्य में चुनाव के बाद हिंसा के रुझानों को देखते हुए केंद्रीय बलों की यह तैनाती जरूरी है। साथ ही, ईवीएम मशीनों के स्ट्रांग रूम और मतगणना केंद्रों की सुरक्षा के लिए भी 200 कंपनियों के बल तैनात करने के निर्देश दिए गए हैं।

राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह कदम आवश्यक माना गया है। वहीं, चुनाव आयोग के अनुसार, दो चरणों में होने वाले बंगाल विधानसभा चुनाव को शांतिपूर्ण बनाने के लिए 2400 केंद्रीय कंपनियों को राज्य में तैनात किया गया है। ये सभी बल चुनाव के दिन मतदान केंद्रों पर अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे।

राज्य में मतदान 23 और 29 अप्रैल को होगा।

इसके अलावा, तृणमूल कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं की सुरक्षा का भी नया मूल्यांकन किया जाएगा। जिन लोगों के ऊपर अब कोई खतरा नहीं है, उनकी सुरक्षा हटा दी जा सकती है। राज्य के पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिए गए हैं कि वे अगले 2-3 दिनों में सुरक्षा प्राप्त व्यक्तियों की स्थिति का व्यावसायिक रूप से पुनर्मूल्यांकन करें।

सूत्रों के अनुसार, चुनाव की घोषणा से पहले राज्य में 832 तृणमूल नेताओं और 144 पार्टी समर्थकों को सुरक्षा दी गई थी, जिनके संरक्षण के लिए 2185 पुलिस कर्मी तैनात थे।