भाजपा ने नितिन नवीन को पार्टी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित किया, जिसके बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस ने इस फैसले की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं और कहा कि भाजपा ने पहले अध्यक्ष तय कर दिया और बाद में चुनाव की औपचारिकताएं पूरी करने की बात कही। कांग्रेस का कहना है कि इस तरह का तरीका पारदर्शी नहीं है और भाजपा के आंतरिक लोकतंत्र के दावों को चुनौती देता है।

कांग्रेस का विरोध
कांग्रेस के मीडिया प्रमुख पवन खेड़ा ने इस प्रक्रिया को लोकतांत्रिक दृष्टिकोण से अनुचित बताया। उन्होंने सवाल किया कि अगर यह चुनाव था तो उसका आयोजन कहां हुआ। उनका कहना था कि भाजपा में संगठनात्मक चुनाव केवल दिखावा बनकर रह गए हैं और असली निर्णय पहले ही बंद कमरों में ले लिए जाते हैं। पवन खेड़ा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भी घसीटते हुए कहा कि इस मामले में चुनाव आयोग की कोई भूमिका नहीं रही, इसलिए “छेड़छाड़” का सवाल ही पैदा नहीं हुआ।

‘बॉस-बॉस’ राजनीति पर कटाक्ष
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान पर भी कांग्रेस ने तंज कसा, जिसमें उन्होंने कहा था कि पार्टी मामलों में नितिन नवीन उनके ‘बॉस’ हैं। पवन खेड़ा ने कहा कि भाजपा में कभी कोई किसी का बॉस बन जाता है और कभी कोई और, और इसे ‘बॉस-बॉस’ का खेल बताया। उनका कहना था कि इससे देश और जनता के वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाया जा रहा है।

कांग्रेस ने हाल ही में गंगा स्नान के विवाद का भी उल्लेख किया। पवन खेड़ा ने कहा कि धर्म के बड़े संत आहत हैं, जबकि भाजपा सत्ता और राजनीतिक खेल में उलझी है। उन्होंने इसे ‘बिग बॉस’ जैसा शो कहा, जिसमें हर दिन नया ड्रामा दिखाया जाता है।

शहरी नक्सल बयान पर हमला
प्रधानमंत्री द्वारा शहरी नक्सल चुनौती का जिक्र करने के बाद कांग्रेस ने आलोचना तेज की। नेता जयराम रमेश ने कहा कि 2020 में गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि ‘अर्बन नक्सल’ शब्द सरकारी शब्दावली का हिस्सा नहीं है। इसके बावजूद प्रधानमंत्री बार-बार इसका इस्तेमाल कर रहे हैं, जो विरोध की आवाजों को बदनाम करने जैसा है।

कांग्रेस का कहना है कि जाति जनगणना या आर्थिक असमानता पर सवाल उठाने वालों को भी ‘शहरी नक्सल सोच’ से जोड़ना लोकतांत्रिक बहस को कमजोर करता है। पार्टी ने प्रधानमंत्री से स्पष्ट जवाब मांगा है कि क्या हर असहमति को इसी नजर से देखा जाएगा।