रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सोमवार को वियतनाम और दक्षिण कोरिया के आधिकारिक दौरे पर रवाना हो गए। इस यात्रा का उद्देश्य भारत की रक्षा साझेदारियों को और मजबूत करना, रणनीतिक सहयोग का विस्तार करना और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता को बढ़ावा देना है।
दौरे की शुरुआत वे हनोई से करेंगे, जहां दोनों देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों और रक्षा सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण चर्चाएं होंगी। राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह यात्रा भारत के अंतरराष्ट्रीय रक्षा संबंधों को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाएगी।
इस दौरे के दौरान रक्षा सहयोग, सैन्य साझेदारी और समुद्री सुरक्षा जैसे मुद्दों पर विशेष जोर रहेगा। भारत वियतनाम और दक्षिण कोरिया के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को और गहरा करने की दिशा में काम कर रहा है। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं, और क्षेत्रीय सहयोग की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है।
भारत और वियतनाम के बीच हाल के वर्षों में रक्षा साझेदारी में लगातार मजबूती देखी गई है। दोनों देशों ने रक्षा नीति संवाद, संयुक्त सैन्य अभ्यास, तकनीकी सहयोग, नौसेना के बंदरगाह दौरे और रक्षा उत्पादन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। इसके अलावा भारत द्वारा दी गई रक्षा ऋण सहायता के माध्यम से वियतनाम की सैन्य क्षमता को भी मजबूत किया जा रहा है।
वहीं भारत और दक्षिण कोरिया ने भी अपने संबंधों को आर्थिक सुरक्षा, रक्षा सहयोग और तकनीकी क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ाया है। दोनों देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को स्वतंत्र और नियम-आधारित बनाए रखने की साझा प्रतिबद्धता रखते हैं। इस साझेदारी के तहत रक्षा उद्योग, उभरती तकनीक, आपूर्ति श्रृंखला और सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में काम चल रहा है।
राजनाथ सिंह की यह यात्रा भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति और हिंद-प्रशांत रणनीति को नई गति देने वाली मानी जा रही है। इससे क्षेत्रीय देशों के साथ भारत के रक्षा और समुद्री सुरक्षा सहयोग को और विस्तार मिलने की उम्मीद है।