बिहार। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शकील अहमद ने शनिवार को पार्टी के अंदरूनी कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में आंतरिक लोकतंत्र नाम की कोई चीज नहीं बची है और पार्टी को अब राहुल गांधी अपने परिवार की पार्टी की तरह चला रहे हैं।
शकील ने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव में वे शशि थरूर को समर्थन देना चाहते थे, लेकिन मजबूरी में मल्लिकार्जुन खरगे को वोट देना पड़ा। उनका कहना था कि राहुल और सोनिया गांधी के करीबी नेताओं ने उन्हें थरूर को वोट देने से रोक दिया।
शकील ने पार्टी की वर्तमान स्थिति को नेपाल के पुराने कानून से जोड़ते हुए कहा, "जैसे नेपाल में राजा के शब्द ही कानून होते थे, वैसे ही कांग्रेस में राहुल गांधी जो कहते हैं, वही चलता है।" उन्होंने सोनिया गांधी के दौर की तुलना करते हुए कहा कि वे नेताओं से लगातार मिलती थीं और सभी को शामिल करती थीं, जबकि अब राहुल गांधी केवल चुनिंदा नेताओं से ही मिलते हैं और अपनी लोकप्रियता को लेकर असुरक्षित महसूस करते हैं।
शशि थरूर से जब इस बयान पर प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने कहा कि वे किसी और के बयान पर कुछ नहीं कह सकते। उनका मानना है कि शकील साहब अपने लिए स्वयं ही जवाब दे सकते हैं।
हाल ही में थरूर भी पार्टी नेतृत्व से असंतुष्ट दिख रहे हैं। केरल में कांग्रेस की बैठकों से वे अक्सर अनुपस्थित रहते हैं। इसके अलावा, उन्होंने सरकार की कुछ नीतियों और ऑपरेशन सिंदूर जैसी पहलों की सराहना भी की है।
शकील अहमद के इस बयान ने कांग्रेस में भीतरू मतभेद और नेतृत्व की कार्यशैली को लेकर नई बहस छेड़ दी है।