गाजियाबाद मासूम हत्याकांड: सुरक्षाकर्मी ने नजरअंदाज की चीखें, बेसहारा कुत्ते ने दिखाई रास्ता

HIGHLIGHTS
- गाजियाबाद के नंदग्राम में मासूम बच्ची की मौत के मामले में निर्माणाधीन मॉल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे हैं।
- परिवार का आरोप है कि सुरक्षाकर्मी ने बच्ची की चीखों को नजरअंदाज किया और समय रहते मदद नहीं की।
- तलाश के दौरान एक बेसहारा कुत्ते ने परिवार को उस जगह तक पहुंचाया, जहां बच्ची मिली थी।
गाजियाबाद के नंदग्राम क्षेत्र में हुई मासूम बच्ची की दर्दनाक मौत के मामले में एक ऐसा पहलू सामने आया है, जिसने लोगों को झकझोर दिया है। निर्माणाधीन मॉल में हुई इस घटना के दौरान जहां एक सुरक्षाकर्मी कथित तौर पर बच्ची की चीखों को समझ नहीं पाया और अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रहा, वहीं एक बेसहारा कुत्ता पीड़ित परिवार के लिए उम्मीद की आखिरी कड़ी बन गया।
पीड़ित परिवार का कहना है कि आरोपी बच्ची को सुरक्षाकर्मी के सामने से ही निर्माणाधीन मॉल के अंदर ले गए थे। पूछताछ के दौरान सुरक्षाकर्मी ने कथित तौर पर माना कि उसने आवाजें सुनी थीं, लेकिन उसे स्थिति असामान्य नहीं लगी। उसने न तो मौके पर जाकर जांच की और न ही बच्ची की तलाश में जुटे परिवार की मदद की।
तलाश के दौरान परिवार के साथ रहा कुत्ता
घटना के बाद परिवार रातभर बच्ची की तलाश करता रहा। हर गुजरता पल उनके लिए चिंता और उम्मीद के बीच बीत रहा था। इसी दौरान बस्ती में रहने वाला एक बेसहारा कुत्ता लगातार परिवार के आसपास मौजूद रहा।
परिजनों के मुताबिक, वह कभी आगे चलता तो कभी वापस आकर उनके पास मंडराता रहा। उस समय किसी को अंदाजा नहीं था कि यह बेजुबान उन्हें किसी अहम जानकारी तक पहुंचाने वाला है।
परिवार के अनुसार, रात करीब 11 बजे जब तलाश में जुटे लोग थक चुके थे, तभी कुत्ता जोर-जोर से भौंकता हुआ बेसमेंट की तरफ दौड़ा। परिवार के लोग उसके पीछे पहुंचे तो वहां बच्ची का शव मिला। इसके बाद भी कुत्ता काफी देर तक शव के पास बैठा रहा।
स्थानीय लोगों में आक्रोश
इस घटना के बाद इलाके के लोगों में भारी गुस्सा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अगर सुरक्षाकर्मी समय रहते सक्रिय हो जाता और संदिग्ध गतिविधि को रोकने की कोशिश करता तो शायद यह घटना टाली जा सकती थी।
आक्रोशित लोगों ने रविवार तड़के सुरक्षाकर्मी के साथ मारपीट भी की। वहीं, पीड़ित परिवार का कहना है कि अगर बच्ची की चीखों को समय रहते गंभीरता से लिया जाता तो आज उनकी बेटी उनके बीच होती।
परिवार ने बताया कि वे कभी-कभार उस बेसहारा कुत्ते को खाना खिलाते थे। अब उनका मानना है कि मुश्किल समय में उसी बेजुबान ने उनका साथ देकर इंसानियत की मिसाल पेश की।
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