दिग्गज गायिका एस. जानकी का निधन, संगीत जगत ने खोया एक अनमोल सितारा

HIGHLIGHTS
- मशहूर प्लेबैक सिंगर एस. जानकी का निधन, संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ी।
- "दक्षिण भारत की नाइटिंगेल" कही जाने वाली जानकी अम्मा ने 48 हजार से ज्यादा गाने और करीब 20 भाषाओं में अपनी आवाज दी।
- छह दशक लंबे करियर में उन्हें चार बार नेशनल अवॉर्ड समेत कई प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया गया।
नई दिल्ली। भारतीय संगीत जगत के लिए एक दुखद खबर सामने आई है। मशहूर प्लेबैक सिंगर एस. जानकी के निधन से देशभर में शोक की लहर है। अपनी मधुर आवाज और शानदार गायकी के लिए प्रसिद्ध एस. जानकी को दक्षिण भारत की "नाइटिंगेल" कहा जाता था। उनके प्रशंसक उन्हें प्यार से "जानकी अम्मा" के नाम से पुकारते थे।
करीब छह दशक लंबे अपने संगीत सफर में एस. जानकी ने 48 हजार से अधिक गानों को अपनी आवाज दी। उन्होंने तेलुगु, तमिल, कन्नड़, मलयालम और हिंदी सहित लगभग 20 भाषाओं में गीत गाए और भारतीय सिनेमा के संगीत को अपनी अनूठी पहचान दी।
नौ साल की उम्र में शुरू हुआ था संगीत सफर
एस. जानकी का जन्म 23 अप्रैल 1938 को तत्कालीन मद्रास प्रेसीडेंसी (अब आंध्र प्रदेश) के गुंटूर जिले के पल्लापाटला गांव में हुआ था। उनके पिता आयुर्वेदिक चिकित्सक थे।
संगीत के प्रति उनका लगाव बचपन से ही था। महज नौ वर्ष की उम्र में उन्होंने पहली बार मंच पर प्रस्तुति दी थी। बाद में उन्होंने शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ली और गायकी में अपनी अलग पहचान बनाई।
20 वर्ष की उम्र में वह संगीत के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए चेन्नई पहुंचीं, जहां उन्होंने संगीतकार आर. सुदर्शनम के साथ काम किया। वर्ष 1957 में तमिल फिल्म 'विधिइन विलायाट्टु' से उन्होंने बतौर प्लेबैक सिंगर अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
कई भाषाओं में दी यादगार आवाज
एस. जानकी ने अपने लंबे करियर में भारतीय सिनेमा के लिए हजारों यादगार गीत गाए। उनकी आवाज ने अलग-अलग भाषाओं और क्षेत्रों के श्रोताओं के बीच खास जगह बनाई। उनकी गायकी की खासियत भावनाओं को आवाज के जरिए प्रस्तुत करना थी।
पद्म भूषण सम्मान लेने से किया था इनकार
एस. जानकी को वर्ष 2013 में पद्म भूषण सम्मान के लिए चुना गया था, लेकिन उन्होंने यह सम्मान लेने से इनकार कर दिया था। उनका कहना था कि उनकी उपलब्धियों के लिए भारत रत्न जैसे सर्वोच्च सम्मान पर विचार किया जाना चाहिए।
अपने शानदार योगदान के लिए उन्हें चार बार सर्वश्रेष्ठ महिला प्लेबैक सिंगर का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। इसके अलावा उन्हें कई अन्य प्रतिष्ठित सम्मानों से भी नवाजा गया।
एस. जानकी का निधन भारतीय संगीत के एक सुनहरे दौर के अंत जैसा है। उनकी आवाज और उनके गीत हमेशा संगीत प्रेमियों के बीच अमर रहेंगे।
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