छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद को एक बड़ा झटका लगा है। गृह मंत्री अमित शाह के राज्य दौरे से पहले ही, सुकमा और बीजापुर में कुल 51 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का साहसिक निर्णय लिया।

बीजापुर जिले में साउथ सब-जोन्ल ब्यूरो से जुड़े 30 इनामी माओवादी कैडरों ने हथियार डालकर शांति और विकास की राह अपनाई। इन पर कुल 85 लाख रुपये का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण करने वालों में 20 महिलाएँ और 10 पुरुष शामिल हैं, जिन्होंने सशस्त्र संघर्ष का त्याग करते हुए संवाद और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की प्रतिबद्धता जताई।

नक्सल विरोधी अभियान में महत्वपूर्ण सफलता
बीजापुर में यह कदम नक्सल विरोधी अभियान की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। 1 जनवरी 2024 से अब तक जिले में 918 माओवादी कैडर मुख्यधारा में लौट चुके हैं, 1163 माओवादी गिरफ्तार किए गए हैं और 232 माओवादी मुठभेड़ों में मारे गए हैं।

सरकार ने 'पुनर्वास से पुनर्जीवन' जैसी पहलों के माध्यम से नक्सलियों को हिंसा का मार्ग छोड़कर समाज में सम्मानजनक जीवन जीने के लिए प्रोत्साहित किया है। इस कदम से न केवल क्षेत्र में सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि विकास की गति भी बढ़ेगी।

सुकमा में भी 21 माओवादी कैडर ने डाले हथियार
सुकमा जिले में भी सुरक्षा बलों के निरंतर प्रयास रंग लाए। यहां 21 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण कर हिंसा का मार्ग छोड़ दिया। इन सभी पर करोड़ों रुपये का इनाम घोषित था। यह सफलता न केवल नक्सल गतिविधियों में कमी लाएगी, बल्कि अन्य युवाओं को भी प्रेरित करेगी कि वे मुख्यधारा में लौटें।

समर्पण और पुनर्वास की दिशा में कदम
51 नक्सलियों का आत्मसमर्पण क्षेत्र में शांति और विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्हें सरकार की 'पुनर्वास से पुनर्जीवन' योजना के तहत शिक्षा, रोजगार और सुरक्षित आवास जैसी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। इस पहल का उद्देश्य उन नक्सलियों को समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाना है जो हिंसा का रास्ता छोड़ शांति और विकास की राह अपनाना चाहते हैं।

इस कदम से न केवल नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विश्वास बहाली होगी, बल्कि सामाजिक समरसता और क्षेत्रीय विकास को भी गति मिलेगी।