छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाले में फंसे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की एकलपीठ ने ईओडब्ल्यू और ईडी से जुड़े मामलों में उन्हें जमानत प्रदान कर दी। यह आदेश न्यायमूर्ति अरविंद वर्मा ने सुनाया। करीब 168 दिन बाद चैतन्य बघेल की जेल से रिहाई का रास्ता साफ हो गया है, हालांकि अन्य प्रकरणों में जांच अभी जारी रहेगी।
ईडी की ओर से अदालत को बताया गया कि चैतन्य बघेल को शराब घोटाले से संबंधित दो मामलों में जमानत मिली है। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस मामले में अब तक कई चार्जशीट दाखिल की जा चुकी हैं, जिनमें हजारों पन्नों के दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य शामिल हैं।
हजारों करोड़ के कथित घोटाले का आरोप
ईओडब्ल्यू और एसीबी का दावा है कि चैतन्य बघेल को तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक के कथित शराब घोटाले में आरोपी बनाया गया है। एजेंसियों के मुताबिक, अब तक आठ चार्जशीट दाखिल हो चुकी हैं, जिनमें गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका, लेन-देन की जानकारी और जांच की प्रगति का विवरण दर्ज है।
सिंडिकेट से जुड़े नेटवर्क में भूमिका का दावा
चार्जशीट में यह भी उल्लेख किया गया है कि चैतन्य बघेल कथित तौर पर प्रशासनिक अधिकारियों और जमीनी स्तर पर काम करने वाले कारोबारियों के बीच समन्वय की भूमिका निभा रहे थे। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस नेटवर्क के जरिए शराब कारोबार से जुड़े फैसले और निर्देश आगे बढ़ाए जाते थे।
रकम के लेन-देन और निवेश का आरोप
जांच एजेंसियों का कहना है कि घोटाले से जुटाई गई रकम को विभिन्न माध्यमों से आगे पहुंचाया गया और बैंकिंग चैनलों के जरिए पारिवारिक फर्मों व रियल एस्टेट परियोजनाओं में लगाया गया। चार्जशीट में यह भी दावा किया गया है कि सहयोगियों और परिचितों के नाम पर निवेश कर धन को मैनेज किया गया।
घोटाले की कुल राशि और सरकारी नुकसान
ईडी के अनुसार, जांच में सामने आया है कि शराब घोटाले से करीब 3,074 करोड़ रुपये की अवैध कमाई हुई, जो आगे बढ़कर तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है। एजेंसी का कहना है कि इस घोटाले से सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा और एक संगठित सिंडिकेट को लाभ मिला। यह गतिविधियां वर्ष 2019 से 2022 के बीच की बताई जा रही हैं, जब राज्य में कांग्रेस की सरकार थी।
गिरफ्तारी और जांच की पृष्ठभूमि
ईडी ने चैतन्य बघेल को उनके जन्मदिन पर 18 जुलाई को भिलाई स्थित आवास से गिरफ्तार किया था। उन पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगे थे। एजेंसी का दावा है कि जांच के दौरान नए साक्ष्य सामने आए, जिनके आधार पर कार्रवाई की गई। इससे पहले भी राज्य के कई जिलों में छापेमारी कर डिजिटल डिवाइस और दस्तावेज जब्त किए गए थे।
व्यवसाय और पारिवारिक पृष्ठभूमि
चैतन्य बघेल रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े बताए जाते हैं और भिलाई में आवासीय परियोजनाओं का संचालन करते हैं। इसके अलावा वे पारिवारिक खेती से भी जुड़े हैं। जांच एजेंसियां उनके कारोबारी लेन-देन और संपत्तियों की भी पड़ताल कर रही हैं।
जांच जारी, कई गिरफ्तारियां पहले ही हो चुकीं
शराब घोटाले से जुड़े इस मामले में अब तक कई पूर्व अधिकारी, कारोबारी और राजनेता गिरफ्तार हो चुके हैं। चैतन्य बघेल को जमानत मिलने के बावजूद एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि अन्य पहलुओं पर जांच जारी रहेगी और आगे भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।