दिल्ली-एनसीआर में शनिवार रात करीब 9.34 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए। झटकों से घबराए लोग अपने-अपने घरों से बाहर निकलकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचे। शुरुआती जानकारी के मुताबिक भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान का हिंदुकुश इलाका रहा।
भूकंप के झटके न केवल दिल्ली-एनसीआर के आसपास के इलाकों में महसूस किए गए बल्कि जम्मू-कश्मीर, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के भी कुछ इलाकों में महसूस हुए। हालांकि अभी तक कहीं से भी किसी प्रकार के नुकसान की जानकारी सामने नहीं आई है।
क्यों आता है भूकंप?
भूकंप तब आता है जब पृथ्वी की सबसे बाहरी परत के बड़े टुकड़े अचानक एक दूसरे के पीछे चले जाते हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक, तुर्किये का भूकंप एक स्ट्राइक-स्लिप भूकंप था। इसे समझने से पहले हमें पृथ्वी की संरचना को समझना होगा। पृथ्वी अलग-अलग हिस्सों में बंटी हुई है। ये हिस्से एक फॉल्ट लाइन पर मिलते हैं, जहां प्लेटें आमतौर पर एक-दूसरे से टकराती हैं। लेकिन कभी-कभी तनाव बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तब प्लेटें बड़ी मात्रा में ऊर्जा निकालते हुए एक-दूसरे को तेजी से पार करती हैं। इस स्थिति में, दो प्लेटें एक-दूसरे को झटके देते हुए दो अलग-अलग दिशाओं में चली जाती हैं। यही प्रक्रिया भूकंप आने का कारण बनती है।
भूकंप के बाद क्यों बार-बार झटके महसूस हो रहे हैं?
भूकंप के बाद अक्सर कई झटके आते हैं, जो घंटों या कई दिनों तक जारी रहते हैं। ये झटके भूकंप के कारण हुई क्षति में और बढ़ोतरी करते हैं। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार, झटके भूकंप की ही एक कड़ी होते हैं जो किसी फॉल्ट पर एक बड़े भूकंप के बाद आते हैं। झटके फाल्टलाइन (जहां चट्टानों के बीच छिद्र होता है) के पास आते हैं। हालांकि, झटके मुख्य भूकंप की तुलना में कमजोर होते हैं, लेकिन ये व्यापक नुकसान पहुंचा सकते हैं। तुर्किये में मुख्य भूकंप के कारण पहले से ही कमजोर हो चुकी इमारतें, झटकों से पूरी तरह से जमींदोज हो गईं।विशेषज्ञों का कहना है कि तुर्की में 7.5 तीव्रता का बड़ा झटका वास्तव में अधिक विनाशकारी हो सकता था। यह झटका हल्का और कम गहरा था। मुख्य भूकंप 17.9 किमी गहराई पर आया था। सतह से निकटता के कारण हल्के भूकंप आमतौर पर गहरे भूकंपों की तुलना में अधिक तीव्र महसूस किए जाते हैं। झटके राहत और बचाव कार्यों में बाधा उत्पन्न करते हैं, कभी-कभी तो बचावकर्मी भी इसकी चपेट में आ जाते हैं।