महाराष्ट्र के नगर निगम चुनावों में महायुति की भारी जीत के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) के मुखपत्र सामना ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उनके गुट पर करारा हमला बोला है। संपादकीय में शिंदे गुट को ‘शाह-सेना’ करार देते हुए अवसरवाद और विचारधारा की कमी के लिए निशाना बनाया गया।
संपादकीय में कहा गया कि मुंबई समेत 26 नगर निगमों में भाजपा लहर का सहारा लेकर शिंदे गुट सत्ता तक पहुंचा। वहीं, शिवसेना (UBT)-मनसे गठबंधन ने कड़ी टक्कर दी, लेकिन संपादकीय में आरोप लगाया गया कि सरकार और चुनाव आयोग के कथित रवैये ने परिणामों को प्रभावित किया।
मतगणना और जश्न को लेकर भी सवाल उठाए गए। सामना ने कहा कि देर रात तक मतगणना में अनियमितताएं होती रहीं, जबकि भाजपा ने परिणाम घोषित होने से पहले ही जश्न शुरू कर दिया। इसे महाराष्ट्र और मराठी समाज के लिए चेतावनी बताया गया। संपादकीय में यह भी आरोप लगाया गया कि भ्रष्टाचार, धन वितरण, ईवीएम में हेरफेर और फर्जी मतदान के माध्यम से चुनाव को प्रभावित किया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमृत काल पर तंज कसते हुए सामना ने कहा कि न तो चुनाव निष्पक्ष हैं और न ही न्याय सुनिश्चित। मतदान के 24 घंटे बाद तक आधिकारिक मतदान प्रतिशत जारी नहीं किया गया, जबकि एग्जिट पोल चैनलों पर पहले ही प्रचार शुरू हो गया।
संपादकीय में मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट उल्लंघन के भी आरोप लगाए गए। बताया गया कि कुछ चुनाव अधिकारी खुले तौर पर भाजपा ऐप का इस्तेमाल कर मतदाताओं के नाम खोजते दिखे। सामना ने चेतावनी दी कि यदि चुनाव आयोग इस पर संज्ञान नहीं लेता है तो सीधे जनप्रतिनिधि नियुक्त किए जाने तक का खतरा बन सकता है।
बीएमसी चुनाव के मुख्य परिणाम (आंकड़े):
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भाजपा: 89 सीटें
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शिवसेना (शिंदे गुट): 29 सीटें
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शिवसेना (UBT): 65 सीटें
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मनसे: 6 सीटें
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कांग्रेस: 24 सीटें
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AIMIM: 8 सीटें
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अन्य: 6