मुंबई। बीएमसी चुनाव के नतीजों के बाद मुंबई महानगर पालिका की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। दशकों से चला आ रहा ठाकरे परिवार का प्रभाव इस बार कमजोर पड़ा है और भाजपा-शिंदे गठबंधन के मेयर बनाने की संभावना बनती दिख रही है। चुनाव परिणामों को लेकर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
संजय राउत ने कहा कि पार्टी के भीतर मौजूद कुछ लोगों की गद्दारी की वजह से यह स्थिति बनी है। उन्होंने आरोप लगाया कि आंतरिक विश्वासघात के कारण ही भाजपा को बढ़त मिली है। राउत का दावा है कि विपक्ष के पास इतनी संख्या मौजूद है कि जरूरत पड़ने पर राजनीतिक समीकरण बदले जा सकते हैं।
कम अंतर से हारी कई सीटें
नगर निगम चुनाव नतीजों पर टिप्पणी करते हुए राउत ने कहा कि मनसे को भले ही छह सीटें मिली हों, लेकिन कई जगह पार्टी बेहद कम मतों से हार गई। शिवसेना (यूबीटी) की भी करीब एक दर्जन सीटें ऐसी रहीं, जहां जीत बेहद मामूली अंतर से हाथ से निकल गई। उन्होंने कहा कि यदि इन सीटों पर परिणाम थोड़ा भी अलग होता, तो मुंबई की तस्वीर कुछ और होती। इसके बावजूद भाजपा-शिंदे गठबंधन के पास बहुत बड़ा बहुमत नहीं है।
विपक्ष मजबूत, सदन में टक्कर
राउत ने कहा कि बीएमसी सदन में विपक्ष की ताकत किसी भी तरह से कमजोर नहीं है। उन्होंने साफ किया कि विपक्ष शहर के हितों से जुड़े मुद्दों पर कोई समझौता नहीं करेगा और नगर निगम को बड़े कॉरपोरेट या ठेकेदारों के हवाले नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सौ से अधिक पार्षद हर उस फैसले का विरोध करेंगे, जो मुंबई के खिलाफ होगा।
तख्तापलट संभव, लेकिन लोकतंत्र पहले
उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष के पास ऐसी संख्या है, जिससे कभी भी सत्ता समीकरण बदले जा सकते हैं, लेकिन पार्टी लोकतांत्रिक मर्यादाओं का सम्मान करती है। राउत ने दोहराया कि यदि पार्टी में भीतरघात न हुआ होता, तो भाजपा के लिए मेयर बनाना आसान नहीं होता।
बराबरी की टक्कर रही—राउत
संजय राउत ने कहा कि यह मानना गलत होगा कि भाजपा ने मुंबई में स्पष्ट जीत दर्ज की है। मुख्यमंत्री होने के नाते सत्ताधारी दल के पास संसाधनों की भरमार थी, इसके बावजूद मुकाबला लगभग बराबरी का रहा। उन्होंने दावा किया कि बीएमसी सदन में विपक्ष और सत्ता पक्ष की ताकत लगभग समान है और मुंबई को किसी भी कीमत पर ‘बेचने’ नहीं दिया जाएगा।