जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने रविवार को जयपुर में रामकथा के दौरान कश्मीर और पाकिस्तान का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कश्मीर हमारा है और हमारे देश का अभिन्न अंग है, इसे देश से कोई अलग नहीं कर सकता। कश्मीर भारत का सिरमौर है। भारत माता आप चिंता मत कीजिए, जब तक जगद्गुरु रामभद्राचार्य का यह त्रिदंड रहेगा, भारत की ओर कुदृष्टि रखने वालों की आंख निकालकर रख दी जाएगी। उन्होंने कहा कि भगवान राम ने देश को एक करने का काम किया था।
पहले प्रधानमंत्री पर टिप्पणी
उन्होंने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का नाम लिए बिना कहा, "हमारे देश का दुर्भाग्य देखिए कि पहले प्रधानमंत्री ने देश को बांटने का काम कर दिया। जो कश्मीर हमारे भारत का मुकुटमणि है, जो ऋषि कश्यप की जन्मस्थली है, जहां भगवान शिव अमरनाथ के रूप में विराजमान हैं और माता वैष्णो का धाम है, उसे आधा कर दिया गया। कश्मीर का आधा हिस्सा पाकिस्तान को दे दिया और जो हिस्सा बचा, उसमें धारा 370 लगवा दी।"
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के बयान का विरोध
ज्योतिष मठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा कश्मीर में धारा 370 बहाल करने को लेकर दिए गए बयान पर रामभद्राचार्य बोले, "अभी एक व्यक्ति का बयान आया है, जिससे मैं काफी दुखी हुआ। वह व्यक्ति खुद को शंकराचार्य कहता है। मैं कहूंगा कि वह शंकराचार्य भी नहीं है, यह मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है। उस व्यक्ति ने बयान दिया कि कश्मीर में धारा 370 बहाल कर दी जाए। धारा 370 कोई खिलौना नहीं है जो इसे बहाल कर दिया जाए। ऐसे लोगों पर ध्यान नहीं देना चाहिए।"
कश्मीर में वंदे मातरम और संपत्ति खरीदने पर प्रतिबंध
रामभद्राचार्य ने कहा, "देश का शायद ही कोई ऐसा नागरिक होगा जो कश्मीर से धारा 370 हटाने पर आपत्ति करे। अब धारा 370 की बात मत करो, कुछ ही समय में पाक अधिकृत कश्मीर भी हमारा होगा। वह दिन दूर नहीं जब विश्व के नक्शे से पाकिस्तान का नामो-निशान मिट जाएगा। पहले हमारे ही कश्मीर में हम वंदे मातरम नहीं कह सकते थे, कोई होटल या जमीन नहीं खरीद सकते थे। धारा 370 हटने के बाद हमें यह अधिकार मिला कि देश का कोई भी नागरिक अब वहां जमीन खरीद सकता है।"
इस अवसर पर डिप्टी सीएम दिया कुमारी भी रामकथा में आशीर्वाद लेने पहुंचीं। रामकथा का आयोजन भी उन्हीं के विधानसभा क्षेत्र में किया जा रहा है।