मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार में लंबे समय से चले आ रहे संपत्ति विवाद में मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश सुनाया। अदालत ने पद्मजा कुमारी परमार की याचिका खारिज कर दी, जिससे इस बहुचर्चित मामले में नया मोड़ आ गया है। यह मामला दिवंगत अरविंद सिंह मेवाड़ की संपत्ति को लेकर उनके पुत्र लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ और पद्मजा कुमारी के बीच चल रहा है।

कोर्ट का आदेश और टिप्पणी

जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद ने अपने आदेश में कहा कि जब तक वसीयत से जुड़ा मामला न्यायालय में लंबित है, तब तक इसे “बिना वसीयत” मानकर कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता। हालांकि अदालत ने पद्मजा कुमारी को वसीयत की संदिग्ध परिस्थितियों पर अपनी दलीलें पेश करने की अनुमति दी है। मामले की अगली सुनवाई 4 मई को होगी।

सुनवाई के बाद पद्मजा कुमारी और उनके परिवार ने पैदल जगदीश मंदिर जाकर दर्शन किए। शहर के विभिन्न हिस्सों में लोगों ने उनका स्वागत किया और मंदिर के बाहर आतिशबाजी भी हुई।

संपत्ति विवाद का दायरा

विवाद में सिटी पैलेस और HRH ग्रुप ऑफ होटल्स सहित कई प्रमुख संपत्तियां शामिल हैं। पद्मजा कुमारी का दावा है कि उनके पिता अरविंद सिंह मेवाड़ ने कोई वैध वसीयत नहीं छोड़ी, जबकि लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ वसीयत के आधार पर अपनी अधिकारिता जताते हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

मेवाड़ राजपरिवार में संपत्ति विवाद नया नहीं है। यह दशकों पुराना है और भगवत सिंह मेवाड़ के समय से ही मतभेद सामने आए। 1984 में भगवत सिंह के निधन के बाद यह विवाद और गहराया। 2020 में जिला अदालत ने संपत्ति को चार हिस्सों में बांटने का आदेश दिया और कई संपत्तियों पर रोक भी लगाई।

आगे की स्थिति

दिल्ली हाईकोर्ट का यह निर्णय फिलहाल लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ के पक्ष में माना जा रहा है, लेकिन अंतिम फैसला अभी बाकी है। 4 मई को अगली सुनवाई में वसीयत की वैधता और दोनों पक्षों के दावों पर विस्तार से बहस होगी।