जयपुर हेरिटेज नगर निगम में महापौर मनीष गुर्जर समेत 50 पार्षदों ने निगम के एडिशनल कमिश्नर राजेंद्र वर्मा को निलंबित करने की मांग पर धरना दे रखा है। शुक्रवार रात से शनिवार सुबह तक धरना जारी है। दरअसल शुक्रवार शाम को निगम के एडिशनल कमिश्नर राजेन्द्र वर्मा के साथ महापौर मुनेश गुर्जर और पार्षदों जोरदार बहस बीट पत्रावली के मुद्दे पर हो गई। महापौर और पार्षदों का आरोप है कि एडिशनल कमिश्नर बीट कार्यों की पत्रावलियों पर साइन नहीं कर रहे हैं। पिछले 15 दिन से फाइलें उन्होंने अपने पास पटक रखी हैं। एडिशनल कमिश्नर ने उन पत्रावलियों पर साइन करने से साफ इनकार कर दिया, जो जनहित के और विकास कार्यों से जुड़ी हैं। इससे जनता में जनप्रतिनिधियों के खिलाफ आक्रोश पनप रहा है। बहसबाजी के बाद नाराज़ पार्षदों ने एडिशनल कमिश्नर राजेन्द्र वर्मा को कमरे में बंद भी कर दिया।
महापौर मुनेश गुर्जर ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर कहा है कि एडिशनल कमिश्नर नगर निगम जयपुर हेरिटेज राजेंद्र कुमार वर्मा महापौर और पार्षदों से अभद्र व्यवहार करते हैं । उन्होंने पत्र में कहा कि महापौर और करीब 50 पार्षद 16 जून को महापौर कक्ष में इकट्ठा होकर बीट की पत्रावली के संबंध में बातचीत कर रहे थे । पार्षदों ने बताया कि बीट की पत्रावली एडिशनल कमिश्नर राजेंद्र कुमार वर्मा के पास पेंडिंग है और उनके द्वारा निस्तारित नहीं की जा रही है। यह पत्रावली करीब 15 दिन से वर्मा के पास पेंडिंग चल रही है। पार्षदों की ओर से बार-बार कहने के बाद भी पत्रावली को एडिशनल कमिश्नर पास नहीं कर रहे हैं। महापौर ने जब एडिशनल कमिश्नर वर्मा को बुलाया तो बार-बार बुलाने पर भी वह नहीं आए। साथ ही महापौर का मोबाइल कॉल भी रिसीव नहीं कियाम इसके बाद सभी पार्षद एडिशनल कमिश्नर के कक्ष में पहुंच गए । तब जाकर पार्षदों के साथ एडिशनल कमिश्नर महापौर के कमरे में उपस्थित हुए। मेयर रूम में एडिशनल कमिश्नर राजेन्द्र कुमार वर्मा ने महापौर और पार्षदों से अभद्र भाषा का प्रयोग किया। साथ ही किसी भी हालत में बीट पत्रावली पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया । वर्मा ने अभद्र भाषा का प्रयोग किया। इस तरह की अभद्र भाषा एक अधिकारी के लिए खराब आचरण का प्रतीक है। पार्षदों और महापौर की उपस्थिति में एक तरह से बोर्ड का स्वरूप ही मौजूद था। इसलिए एडिशनल कमिश्नर राजेंद्र कुमार वर्मा को तुरंत प्रभाव से निलंबित करने की मांग करते हैं। आज ही उन्हें निलंबित नहीं किया, तो हम बोर्ड और पार्षद पद से इस्तीफा दे रहे हैं।
एडिशनल कमिश्नर पर अभद्र भाषा और मनमानी का आरोप
मुनेश गुर्जर ने मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि एडिशनल कमिश्नर अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं और हमेशा अपनी मनमानी करते हैं । जनता के काम और सफाई जैसे मुद्दों को लेकर भी ढिलाई बरतते आ रहे हैं। इससे जयपुर शहर के परकोटे में इस वर्ल्ड हेरिटेज सिटी की सफाई व्यवस्था चौपट हो गई है। हम जनप्रतिनिधि होने के कारण इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेंगे। चुनाव से पहले जनता में क्या इमेज जाएगी यह भी सोचना चाहिए। दरअसल नगर निगम के पार्षदों को उनके इलाकों में 5-5 अस्थायी कर्मचारी दिए जाते हैं। इसके लिए एडिशनल कमिश्नर के निर्देशन में गठित टीम टेंडर प्रकिया निकलने वाली थी। पार्षदों ने आरोप लगाया कि एडिशनल कमिश्नर राजेन्द्र वर्मा पिछले 15 दिनों से टेंडर की नोटशीट पर साइन नहीं कर रहे हैं। जिससे यह काम अटका हुआ है। जबकि सभी इलाकों में आगामी मानसून पीरियड को देखते हुए कर्मचारियों की सख्त जरूरत है।
एडिशनल कमिश्नर ने कहा- मैंने अभद्र भाषा में बात नहीं की
जयपुर हेरिटेज नगर निगम के एडीशनल कमिश्नर राजेंद्र वर्मा ने खुद पर लगे आरोपों का खंडन किया है । उन्होंने कहा मैंने किसी से, किसी भी तरह की अभद्र भाषा में बात नहीं की। उलटे कुछ पार्षदों ने मेरे साथ में बदतमीजी की है। कमरे को भी बंद कर दिया। जिस पत्रावली की नोटशीट पर पार्षद दबाव बनाकर मुझसे साइन करवाना चाहते हैं। उस पर अभी कमेटी का फैसला नहीं हुआ है। कमेटी के फैसले के बाद ही उस पर साइन हो सकते हैं।
पीएचडी मंत्री महेश जोशी ने की समझाइश
गहलोत सरकार में पीएचईडी विभाग के कैबिनेट मंत्री महेश जोशी को जब घटना की जानकारी लगी, तो वह भी नगर निगम हेरिटेज पहुंचे । जोशी ने महापौर, पार्षदों और एडिशनल कमिश्नर से बातचीत कर विवाद का कारण जाना और सभी को सुना। मंत्री महेश जोशी ने कहा कि मैं दोनों पक्षों की बात को उच्च स्तर पर रखूंगा। ताकि जल्द ही इस समस्या का सॉल्यूशन निकले। मंत्री महेश जोशी के निगम से देर शाम रवाना होने के बाद एडिशनल कमिश्नर भी पुलिस की मौजूदगी में नगर निगम मुख्यालय से निकल गए।