मेरठ: सरधना थाना क्षेत्र के कपसाड़ गांव में एक निजी इलेक्ट्रॉनिक चैनल के पत्रकार ने पुलिसकर्मियों पर धक्का-मुक्की और मारपीट का आरोप लगाया है। पत्रकार का कहना है कि पुलिस ने उन्हें कवरेज करने से रोकने की कोशिश की, जिससे मौके पर तनावपूर्ण स्थिति बन गई।

मीडिया एंट्री पर सख्त पाबंदी

सूत्रों के अनुसार, कपसाड़ गांव के मुख्य रास्तों और संपर्क मार्गों पर पुलिस ने कड़ी घेराबंदी की हुई है। मीडिया कर्मियों का गांव में प्रवेश लगभग पूरी तरह से प्रतिबंधित है। बावजूद इसके, कुछ पत्रकार पगडंडियों के रास्ते गांव में पहुँचने में सफल रहे।

पीड़ित परिवार के घर जाने से रोका

मीडियाकर्मी ने बताया कि वह पीड़ित परिवार के घर जा रहे थे, जहाँ पूर्व विधायक संगीत सोम मौजूद थे और वह उनसे मामले पर बातचीत करना चाहते थे। इसी दौरान, घर की ओर जाने वाले रास्ते पर तैनात पुलिसकर्मियों ने उन्हें जबरन रोक लिया।

विरोध करने पर मारपीट का आरोप

पत्रकार ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने रोकने का विरोध किया, तो पुलिसकर्मियों ने उनके साथ मारपीट की। इस घटना के बाद मौके पर मौजूद अन्य पत्रकारों में भी पुलिस के रवैये को लेकर रोष फैल गया।

लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ कार्रवाई का आरोप

मीडिया का कहना है कि कवरेज रोकना और पत्रकारों के साथ अभद्र व्यवहार करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। पत्रकार वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत करने की तैयारी कर रहे हैं।

सलावा चौराहे पर बैरिकेडिंग से लंबा जाम

सलावा चौराहे पर पुलिस द्वारा बैरिकेडिंग किए जाने के कारण कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया। जाम से राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। घंटों तक वाहन रेंगते नजर आए, जिससे लोगों की दिनचर्या प्रभावित हुई।

गाजियाबाद जिले के लोनी निवासी परवेज़ ने बताया कि वह खतौली से रिश्तेदारी से लौट रहे थे और शाम को ड्यूटी पर पहुंचना था, लेकिन जाम में फंसने के कारण उन्हें काफी दिक्कत हुई। वहीं, ई-रिक्शा चालक लुकमान ने बताया कि वह सवारियों के साथ सठेड़ी से कैली जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे जाने की अनुमति नहीं दी और जबरन वापस लौटाया।

इस तरह, बैरिकेडिंग और सुरक्षा इंतजामों ने न केवल पत्रकारों बल्कि आम नागरिकों और दैनिक यात्रियों के लिए भी मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।