कपसाड़ गांव की रूबी के अपहरण और उसकी मां सुनीता की हत्या के आरोपी पारस सोम की उम्र को लेकर चल रही कानूनी प्रक्रिया में अब अदालत का फैसला आने का इंतजार है। शनिवार को एससी-एसटी एक्ट की विशेष अदालत में इस मुद्दे पर सुनवाई हुई, लेकिन वादी पक्ष की ओर से कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं किया जा सका। इसके बाद दोनों पक्षों की दलीलें सुनकर अदालत ने आदेश सुरक्षित रख लिया है।

यह मामला 8 जनवरी को सरधना थाना क्षेत्र के कपसाड़ गांव से जुड़ा है, जहां रूबी का अपहरण किया गया था। विरोध करने पर उसकी मां सुनीता की फरसे से वार कर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में आरोपी पारस सोम फिलहाल जेल में बंद है। उसके परिवार की ओर से अदालत में याचिका दाखिल कर यह दावा किया गया है कि आरोपी घटना के समय नाबालिग था। इस याचिका पर एडीजे मोहम्मद असलम सिद्दीकी की अदालत में सुनवाई चल रही है।

सुनवाई के दौरान रूबी पक्ष के वकील ने अदालत से मांग की थी कि आरोपी की उम्र की पुष्टि के लिए उसकी पांचवीं कक्षा से जुड़े शैक्षिक रिकॉर्ड मंगवाए जाएं। वहीं आरोपी के अधिवक्ता संजीव राणा ने इसका विरोध करते हुए कहा कि उम्र का निर्धारण दसवीं कक्षा की मार्कशीट के आधार पर होना चाहिए, इसलिए उसी से संबंधित दस्तावेज अदालत में बुलाए जाएं।

इस बहस के बाद वादी पक्ष ने पांचवीं कक्षा के रिकॉर्ड से जुड़ी कानूनी व्याख्या प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा था, लेकिन मंगलवार की सुनवाई में वे कोई दस्तावेज या साक्ष्य पेश नहीं कर सके। इस स्थिति में अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद मामले को फैसले के लिए सुरक्षित कर लिया।