शामली: सर्दियों के दौरान बारिश न होने से बेहतर मानी जा रही गेहूं की फसल अब बेमौसम बरसात की वजह से संकट में आ गई है। कटाई के समय हुई लगातार बारिश ने किसानों की महीनों की मेहनत पर असर डाल दिया है। पिछले दो दिनों से खराब मौसम के चलते खेतों में खड़ी और काटी गई दोनों तरह की फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।

किसानों के अनुसार मार्च में तापमान अधिक रहने के कारण गेहूं की फसल समय से पहले पककर तैयार हो गई थी, जिसके चलते कई किसानों ने कटाई भी शुरू कर दी थी। लेकिन अचानक मौसम में आए बदलाव और लगातार बादल व नमी के कारण कटाई का काम रुक गया है।

बुधवार को हुई तेज बारिश ने स्थिति और बिगाड़ दी, जिससे खेतों में पानी भर गया और कटाई लगभग ठप हो गई। पहले से काटकर रखी गई फसल भी भीगने के कारण खराब होने की कगार पर है। किसानों को डर है कि यदि मौसम ऐसे ही बना रहा तो गेहूं के दाने काले पड़ सकते हैं, जिससे पैदावार और गुणवत्ता दोनों पर असर पड़ेगा।

गन्ने की बुवाई पर भी असर

इस समय चल रही ग्रीष्मकालीन गन्ने की बुवाई भी बारिश से प्रभावित हुई है। किसानों का कहना है कि पहले ही बुवाई में देरी हो रही थी और अब मौसम बाधा बनने से उत्पादन पर और असर पड़ सकता है।

किसानों की प्रतिक्रिया

किसान नीटू कश्यप ने बताया कि इस बार फसल अच्छी स्थिति में थी, लेकिन अचानक हुई बारिश ने पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया। उनके अनुसार कई बीघा फसल जमीन पर गिर चुकी है, जिससे भारी नुकसान की आशंका है।

किसान कुलदीप सैनी ने कहा कि गिरी हुई फसल में दानों की गुणवत्ता खराब हो जाती है और उन्हें मंडी में सही दाम नहीं मिल पाता, जिससे लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता है।

वहीं किसान लोकेश सैनी ने आशंका जताई कि यदि मौसम नहीं सुधरा तो पूरी फसल प्रभावित हो सकती है। उन्होंने सरकार से जल्द सर्वे कराकर किसानों को मुआवजा देने की मांग की है।

कृषि विभाग की सलाह

कृषि अधिकारी प्रदीप यादव ने किसानों को सलाह दी है कि बारिश से भीगी गेहूं की फसल की कटाई तुरंत न करें। उन्होंने कहा कि फसल को पहले पूरी तरह सूखने दें, उसके बाद ही कटाई करें। साथ ही सब्जी फसलों में फिलहाल सिंचाई न करने की भी सलाह दी गई है।