देवरिया: मजार को लेकर वर्षों से विवाद चलता रहा है। 2017 में धन उगाही का मामला सुर्खियों में आया था, जिसमें सदर कोतवाली में चार लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया था। उस समय आरोप यह था कि कुछ लोग प्रबंधन के नाम पर रसीदें छपवा कर लोगों से धन उगाही कर रहे थे, जबकि दूसरे पक्ष का दावा था कि वे फर्जी रसीदें बना रहे थे। बाद में पुलिस ने अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की थी।
मामले के अनुसार, जिले के साथ-साथ कुशीनगर, महराजगंज, गोपालगंज और सिवान के लोग भी मजार पर लगने वाले उर्स और अन्य कार्यक्रमों के लिए आर्थिक रूप से शोषित किए गए थे। कथित तौर पर इस धन उगाही की राशि 25-30 लाख रुपये से अधिक थी। इसके बाद प्रबंध समिति में बदलाव किया गया।
मजार पर मानसिक रूप से परेशान लोग भी आते रहे
स्थानीय लोग बताते हैं कि मजार से सालाना लाखों रुपये की आमदनी होती रही है। यहां मानसिक रूप से परेशान महिलाएं बड़ी संख्या में आती रही हैं। मेडिकल कॉलेज की मानसिक रोग विभाग की टीम यहां पहुंचकर लोगों को झाड़-फूंक के बजाय वैज्ञानिक तरीके से उपचार की सलाह देती थी।
सदर विधायक को धमकी भी मिली थी
अगस्त 2025 में मजार की खबरों के बाद सदर विधायक डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी को इंटरनेट पर धमकी दी गई थी। पुलिस ने सक्रियता दिखाई, लेकिन इस मामले में आरोपी पकड़ में नहीं आए।
कृषि मंत्री से मुलाकात
मजार की देखरेख करने वाली प्रबंध समिति के अध्यक्ष मोहम्मद राशिद खां और उपाध्यक्ष जलालुद्दीन खां रविवार को राघवनगर में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही के आवास पहुंचे और अपनी बात रखी, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं मिली।
अवैध मजार के ध्वस्तीकरण पर जनता और नेताओं की प्रतिक्रिया
जनपदवासियों ने अवैध मजार के ध्वस्तीकरण पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सराहना की। सदर विधायक डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी ने कहा कि अवैध मजार के विरोध में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक राम नगीना यादव की बेरहमी से हत्या हुई थी। अब न्याय की कार्रवाई हुई है, और प्रशासन से अपेक्षा है कि मजार कमेटी से जुड़े लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाए और सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जे का संपूर्ण हिसाब लिया जाए। उन्होंने कहा, “जितने वर्षों तक सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा रहा, उसकी एक-एक पाई वसूल की जानी चाहिए।”