ऑनलाइन निवेश के नाम पर 1.87 करोड़ की ठगी, लुधियाना से साइबर आरोपी गिरफ्तार

देहरादून। रिटायर्ड ओएनजीसी अधिकारी को ऑनलाइन निवेश और ट्रेडिंग के नाम पर झांसा देकर 1.87 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में उत्तराखंड एसटीएफ ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक साइबर अपराधी को लुधियाना (पंजाब) से गिरफ्तार किया है। आरोपी के खिलाफ महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना और गुजरात समेत कई राज्यों में भी शिकायतें दर्ज हैं।
जांच में सामने आया कि ठगों ने नामी कंपनियों और ब्रांड्स की फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर लोगों को व्हाट्सएप ग्रुप से जोड़कर निवेश के लिए प्रेरित किया। ग्रुप में लगातार कथित मुनाफे के स्क्रीनशॉट और ट्रेडिंग अपडेट साझा कर भरोसा कायम किया जाता था।
पीड़ित Dilip Kumar Srivastava (70) ने साइबर क्राइम पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वे वर्ष 2016 में ओएनजीसी से सेवानिवृत्त हुए थे। 31 जनवरी को उनके मोबाइल पर निवेश से जुड़ा संदेश आया, जिसके बाद एक महिला ने खुद को निवेश सलाहकार बताकर संपर्क किया।
इसके बाद उन्हें “एबीएसएल दि ग्रुप ऑफ विजडम” नामक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया, जहां कथित विशेषज्ञों द्वारा शेयर बाजार में भारी मुनाफे का दावा किया जाता रहा। धीरे-धीरे उन्हें हाई-नेटवर्थ ट्रेडिंग अकाउंट खोलने के लिए प्रेरित किया गया, जिसे SEBI रजिस्टर्ड बताकर वैध प्लेटफॉर्म का भरोसा दिलाया गया।
शिकायत के अनुसार, इस पूरे रैकेट में दीया मेहरा, अनन्या शास्त्री और खुद को प्रोफेसर ए. बालासुब्रमण्यम बताने वाले व्यक्ति शामिल थे। फर्जी मुनाफे के लालच में पीड़ित ने अलग-अलग खातों में 1.17 करोड़ रुपये से अधिक ट्रांसफर किए, जबकि 70 लाख रुपये ब्रोकरेज शुल्क के नाम पर जमा कराए गए।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उनके खाते में लगभग 14.50 करोड़ रुपये का फर्जी लाभ दिखाया गया। बाद में इनकम टैक्स क्लियरेंस के नाम पर अतिरिक्त एक करोड़ रुपये की मांग की गई, जिसके बाद पीड़ित को शक हुआ।
जब उन्होंने रकम निकालने की कोशिश की तो उनका खाता ब्लॉक कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई।
जांच के बाद पुलिस ने बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की ट्रेसिंग करते हुए सुखराज, निवासी प्रेम विहार, नूराला रोड, शिवपुरी, थाना बस्ती जोधेवाला, लुधियाना (पंजाब) को गिरफ्तार किया।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने ठगी के लिए एक बैंक खाता केवल दो महीने के लिए खोला था, जिसमें कुछ ही दिनों में करीब 18 लाख रुपये का लेन-देन हुआ। इसमें से 5.60 लाख रुपये रिटायर्ड अधिकारी से संबंधित थे।
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