जेवर एयरपोर्ट से कमर्शियल उड़ानों की शुरुआत, पहली फ्लाइट की सफल लैंडिंग

नोएडा। जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से रविवार को व्यावसायिक उड़ानों का औपचारिक संचालन शुरू हो गया। सुबह पहली कमर्शियल फ्लाइट की सफल लैंडिंग के साथ ही एयरपोर्ट ने अपने नियमित संचालन की ऐतिहासिक शुरुआत दर्ज की। इस अवसर पर केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने बोर्डिंग गेट का फीता काटकर सेवाओं का उद्घाटन किया। पहली इंडिगो उड़ान लखनऊ से नोएडा एयरपोर्ट पहुंची, जहां जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की बड़ी संख्या मौजूद रही।
उद्घाटन उड़ान के तहत लगभग 170 किसानों को विशेष सम्मान दिया गया, जिन्होंने इस परियोजना के लिए अपनी जमीन दी थी। इन किसानों को विशेष विमान से लखनऊ ले जाया गया, जहां उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। इसके बाद यही विमान उन्हें वापस नोएडा एयरपोर्ट लेकर आया।
एयरपोर्ट को आधुनिक तकनीक और भारतीय सांस्कृतिक पहचान के मेल के रूप में विकसित किया गया है। टर्मिनल भवन के डिजाइन में वाराणसी के घाटों और उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहर की झलक दिखाई देती है। निर्माण में भारतीय वास्तुशिल्प, पर्यावरणीय संतुलन और आधुनिक सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है।
यात्रियों की सुविधा के लिए एयरपोर्ट पर डिजी यात्रा प्रणाली लागू की गई है, जिसमें चेहरा ही बोर्डिंग पास के रूप में काम करेगा। इससे चेक-इन और बोर्डिंग प्रक्रिया अधिक तेज और सरल हो जाएगी। इसके अलावा हाई-स्पीड एक्सीलेटर, लिफ्ट, अत्याधुनिक बैगेज सिस्टम और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
लखनऊ और नोएडा के बीच हवाई सेवा की शुरुआत 15 जून से की गई है, जबकि 1 जुलाई 2026 से इस रूट पर नियमित उड़ानें शुरू होने की संभावना जताई गई है। दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय लगभग एक घंटे का होगा। इंडिगो की यह फ्लाइट सुबह लखनऊ से उड़ान भरकर नोएडा पहुंची और शाम को वापसी करेगी।
सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सीआईएसएफ, उत्तर प्रदेश पुलिस और निजी सुरक्षा एजेंसियों की तैनाती की गई है। पूरे परिसर की निगरानी एआई आधारित कैमरों और आधुनिक सिस्टम के जरिए की जा रही है।
साथ ही एयरपोर्ट को पर्यावरण अनुकूल बनाने पर भी जोर दिया गया है। सौर और पवन ऊर्जा के उपयोग से लगभग 50 प्रतिशत बिजली जरूरतें नवीकरणीय स्रोतों से पूरी करने की योजना है। यह एयरपोर्ट आने वाले समय में भारत की विमानन क्षमता और सांस्कृतिक पहचान का प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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