देहरादून में गैस संकट: छोटे रेस्टोरेंट और ढाबे बंद होने की कगार पर

देहरादून: जिले में घरेलू गैस सिलिंडर की लगातार आपूर्ति के बावजूद बैकलाग घट नहीं पा रहा है। वहीं, कमर्शियल सिलिंडरों की सप्लाई अभी पटरी पर नहीं लौट पाई, जिससे छोटे रेस्टोरेंट, ढाबे, रेहड़ी-ठेलियों और दुकानों पर संकट लगातार बढ़ रहा है।
गैस की कमी के कारण कई प्रतिष्ठान बंद होने की स्थिति में हैं। कुछ व्यवसायी लकड़ी, कोयला भट्टी और बिजली उपकरणों के जरिए अपने रेस्टोरेंट या ढाबों को चलाने को मजबूर हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार, कमर्शियल क्षेत्र में केवल 31 प्रतिशत गैस की आपूर्ति की जा रही है, जो स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्रों तक सीमित है।
घरेलू गैस में थोड़ी राहत, लेकिन बैकलाग कम नहीं
घरेलू गैस की आपूर्ति से उपभोक्ताओं को कुछ हद तक राहत मिली है, लेकिन बैकलाग का आंकड़ा 90 हजार सिलिंडर से नीचे नहीं आ पाया है। युद्ध और वैश्विक संकट के चलते गैस उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ी हुई है। पिछले एक माह से ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध के कारण घरेलू और कमर्शियल दोनों तरह के उपभोक्ता परेशान हैं।
शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में एजेंसियों द्वारा प्रतिदिन सिलिंडर डिलीवर किए जा रहे हैं, लेकिन सीमित सप्लाई की वजह से छोटे व्यवसायी पर्याप्त गैस नहीं प्राप्त कर पा रहे हैं।
छोटे रेस्टोरेंट और ढाबे प्रभावित
पथरी बाग चौक स्थित फूडीज हब के स्वामी महावीर राणा ने बताया कि गैस की कमी के कारण केवल दाल-चावल, राजमा और छोले जैसी बेसिक डिश बनाई जा रही हैं। अधिक ईंधन खपत वाले व्यंजन जैसे चाऊमीन, मोमोज और पराठे फिलहाल बंद कर दिए गए हैं। इसी कारण ग्राहक निराश होकर लौट रहे हैं।
भंडारी बाग स्थित फास्ट फूड रेस्टोरेंट के मालिक राज कुमार ने कहा कि पिछले एक महीने से गैस नहीं मिली है। कारोबार को चलाने के लिए भट्टी पर चिकन, मछली और चावल तैयार किए जा रहे हैं, जबकि बर्गर, मोमोज और चाऊमीन बंद हैं।
सर्वे चौक स्थित भट्ट रेस्टॉरेंट और करनपुर स्थित न्यू रेड चिल्ली फैमिली रेस्टॉरेंट भी गैस की कमी के कारण बंद हो गए हैं। चिल्ली रेस्टॉरेंट के मालिक आशीष सोनकर ने कहा कि पर्याप्त गैस नहीं मिलने से रेस्टोरेंट संचालित रखना मुश्किल था।
गैस सिलिंडर से डीजल भट्टी बनाने का चलन
गैस की कमी के चलते लोग सिलिंडर से डीजल भट्टी बनाने लगे हैं। प्रिंस चौक के दुकानदार कासीम रोजाना चार-पाँच भट्टियां तैयार कर रहे हैं। छोटे सिलिंडर को काटकर पाइप के जरिए चूल्हे से जोड़ा जाता है। एक भट्टी की कीमत 700-1000 रुपये होती है, जबकि बाजार में इसे 3,000 रुपये तक बेचा जा रहा है।
डिलीवरी पर कोई प्रतिबंध नहीं
दो-पहिया वाहनों से सिलिंडर डिलीवरी पर कोई प्रतिबंध नहीं है, लेकिन डिलीवरी मैन के पास जरूरी दस्तावेज होना अनिवार्य है। डीएसओ केके अग्रवाल ने बताया कि डिलीवरी के समय ड्रेस, वाहन से संबंधित दस्तावेज और अनुबंध पत्र साथ रखना जरूरी है। यह कदम कालाबाजारी रोकने और नियमों के पालन के लिए उठाया गया है।
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