पूर्व एशियन गेम्स गोल्ड मेडलिस्ट जसपाल राणा का 49 वर्ष की उम्र में निधन

नई दिल्ली। भारतीय निशानेबाजी जगत के दिग्गज खिलाड़ी और प्रसिद्ध कोच जसपाल राणा का शुक्रवार को 49 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वह भारतीय पिस्टल शूटिंग टीम के हाई परफॉर्मेंस कोच के रूप में कार्यरत थे। जानकारी के अनुसार, म्यूनिख में आईएसएसएफ वर्ल्ड कप से लौटते समय उन्हें अस्वस्थता महसूस हुई।
दिल्ली पहुंचने के बाद उन्हें साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। राष्ट्रीय राइफल संघ (NRAI) ने उनके निधन की आधिकारिक पुष्टि की है।
भारतीय शूटिंग को बड़ी क्षति
जसपाल राणा का निधन भारतीय खेल जगत के लिए एक गहरा सदमा माना जा रहा है। तीन दशकों से अधिक लंबे करियर में उन्होंने खिलाड़ी और कोच दोनों भूमिकाओं में भारतीय शूटिंग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
1990 के दशक में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन चैंपियनशिप में कई पदक जीतकर अपनी पहचान बनाई।
करियर और उपलब्धियों की विरासत
जसपाल राणा ने न सिर्फ भारत का प्रतिनिधित्व किया बल्कि उस दौर में शूटिंग खेल को देश में लोकप्रिय बनाने में भी अहम भूमिका निभाई। उनके प्रदर्शन ने युवा खिलाड़ियों को इस खेल की ओर आकर्षित किया और भारत में शूटिंग के विकास की नींव मजबूत की।
खिलाड़ी के रूप में सफल करियर के बाद उन्होंने कोचिंग की जिम्मेदारी संभाली और जल्द ही भारतीय शूटिंग सिस्टम के सबसे प्रभावशाली कोचों में शामिल हो गए। 2012 में उन्हें जूनियर पिस्टल प्रोग्राम की जिम्मेदारी सौंपी गई, जहां उन्होंने कई होनहार खिलाड़ियों को तैयार किया।
कोचिंग में भी शानदार योगदान
उनकी कोचिंग में सौरभ चौधरी, अनिश भानवाला और चिंकी यादव जैसे खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की। जसपाल राणा को उनकी तकनीकी समझ, रणनीतिक प्रशिक्षण और दबाव में खिलाड़ियों को तैयार करने की क्षमता के लिए जाना जाता था।
वे अभ्यास के दौरान प्रतिस्पर्धा जैसे माहौल तैयार करने पर विशेष ध्यान देते थे, जिससे खिलाड़ी बड़े टूर्नामेंट्स के लिए मानसिक रूप से मजबूत बन सकें।
मनु भाकर के करियर में अहम भूमिका
जसपाल राणा का कोचिंग करियर का एक महत्वपूर्ण अध्याय ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर से जुड़ा रहा। उनकी देखरेख में मनु भाकर ने तैयारी को नई दिशा दी, जिसका परिणाम पेरिस ओलंपिक में देखने को मिला, जहां उन्होंने दो ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास रचा।
सम्मान और योगदान
भारतीय शूटिंग में उनके योगदान को देखते हुए राष्ट्रीय राइफल संघ ने फरवरी 2025 में उन्हें 25 मीटर पिस्टल श्रेणी का हाई परफॉर्मेंस कोच नियुक्त किया था। वे अंतिम समय तक राष्ट्रीय टीम के साथ सक्रिय रूप से जुड़े रहे।
साल 2020 में उन्हें कोचिंग और खिलाड़ी विकास में उत्कृष्ट योगदान के लिए द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, जो भारतीय खेल जगत के सर्वोच्च सम्मानों में से एक है।
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