राम मंदिर दान विवाद: कल होगी ट्रस्ट की बैठक, चंपत राय और अनिल मिश्रा की विदाई तय

HIGHLIGHTS
- राम मंदिर दान विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक सोमवार को होगी।
- इसमें चंपत राय और डॉ.
- अनिल मिश्रा के इस्तीफों समेत SIT जांच और दान व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी।
अयोध्या में राम मंदिर के दान (चढ़ावा) से जुड़ी कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पहली अहम बैठक सोमवार को आयोजित होगी। इस बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होनी है, लेकिन सबसे अधिक नजर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफों पर रहने वाली है। सूत्रों के अनुसार, दोनों के इस्तीफों पर ट्रस्ट अंतिम निर्णय ले सकता है।
बताया जा रहा है कि चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा ने 26 जून को अपने पदों से इस्तीफा सौंप दिया था, जिसकी पुष्टि अगले दिन ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने की थी।
बैठक में कई अहम एजेंडे पर होगी चर्चा
ट्रस्ट की बैठक में केवल इस्तीफों पर ही नहीं, बल्कि दान राशि की गणना व्यवस्था, मंदिर प्रशासन से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों और वित्त वर्ष 2025-26 के ऑडिट पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। इसके अलावा विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट भी ट्रस्ट सदस्यों के सामने रखी जा सकती है।
सूत्रों के मुताबिक, निर्णय लेने से पहले चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा को अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया जाएगा।
दान विवाद के बाद तेज हुई जांच
राम मंदिर के दान से जुड़े कथित गड़बड़ी के मामले के सामने आने के बाद ट्रस्ट की मांग पर 13 जून को एसआईटी का गठन किया गया था। इसके बाद 25 जून को एफआईआर दर्ज हुई और जांच के दौरान अब तक आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
चूंकि दान की गणना और संबंधित व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों के पास थी, इसलिए पूरे मामले में कई सवाल उठे हैं। फिलहाल जांच एजेंसियां वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की पड़ताल कर रही हैं।
गोविंद देव गिरि बोले- जांच पूरी होने दें, दोषी कोई भी हो बख्शा न जाए
रविवार को ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने रामभक्तों के नाम एक विस्तृत संदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि चोरी कितनी हुई, कब हुई और किस प्रकार हुई, इसका निष्कर्ष केवल निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आएगा। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे एसआईटी, पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा रखें।
उन्होंने इस घटना को अत्यंत दुखद बताते हुए कहा कि यदि कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके पद या प्रभाव को नहीं देखा जाना चाहिए और कानून के अनुसार उसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
दान की गिनती से खुद को बताया अलग
स्वामी गोविंद देव गिरि ने स्पष्ट किया कि उनका दान की गिनती की प्रक्रिया से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं रहा है। उन्होंने बताया कि उनका निवास पुणे में है और दान की गणना स्थानीय ट्रस्ट पदाधिकारी तथा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के सहयोग से निर्धारित प्रक्रिया के तहत की जाती रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि ट्रस्ट के सभी वित्तीय रिकॉर्ड नियमित रूप से ऑडिट होते हैं और प्रत्येक माह चार्टर्ड अकाउंटेंट खातों की समीक्षा करते हैं। उनके अनुसार, उन्होंने कभी व्यक्तिगत रूप से मंदिर के लिए नकद दान स्वीकार नहीं किया और न ही किसी भुगतान प्रक्रिया में उनकी भूमिका रही है।
संत समाज ने की निष्पक्ष जांच की मांग
दान विवाद के बीच अयोध्या के राम कचहरी में संत समाज की बैठक भी हुई, जिसमें कई संतों ने कहा कि जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं है। उनका कहना था कि यदि किसी के पास ठोस सबूत हैं तो उन्हें सार्वजनिक मंचों पर आरोप लगाने के बजाय एसआईटी को सौंपना चाहिए।
महंत शशिकांत दास ने कहा कि दोषी चाहे कोई भी हो, उसे कानून के अनुसार सजा मिलनी चाहिए, लेकिन जांच पूरी होने से पहले किसी की छवि खराब करना न्यायसंगत नहीं है। वहीं संत सीताराम दास ने भी पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर देते हुए लोगों से अफवाहों से बचने की अपील की।
फिलहाल सभी की नजर ट्रस्ट की सोमवार को होने वाली बैठक और उसमें लिए जाने वाले फैसलों पर टिकी हुई है, जो इस पूरे प्रकरण की दिशा तय कर सकते हैं।
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