ट्रंप की धमकी के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने बीच में ही छोड़ दी वार्ता

HIGHLIGHTS
- अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनावपूर्ण हालात के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही शांति वार्ता को लेकर बड़ा राजनीतिक और कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है।
- ईरान की वार्ता टीम के एक सदस्य ने सरकारी मीडिया को दिए बयान में साफ किया है कि यदि लेबनान में संघर्ष समाप्त नहीं होता, तो अन्य मुद्दों पर बातचीत आगे नहीं बढ़ाई जाएगी।
- इसी बीच स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता शुरू हुई, जिसका उद्देश्य पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव को कम करना बताया जा रहा है।
- इस बातचीत को लेकर अमेरिका के…
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनावपूर्ण हालात के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही शांति वार्ता को लेकर बड़ा राजनीतिक और कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। ईरान की वार्ता टीम के एक सदस्य ने सरकारी मीडिया को दिए बयान में साफ किया है कि यदि लेबनान में संघर्ष समाप्त नहीं होता, तो अन्य मुद्दों पर बातचीत आगे नहीं बढ़ाई जाएगी।
इसी बीच स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता शुरू हुई, जिसका उद्देश्य पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव को कम करना बताया जा रहा है। इस बातचीत को लेकर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने दावा किया कि उनकी ईरानी अधिकारियों से बातचीत हुई है और उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से बंद किया गया तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को दिए बयान में कहा कि अगर ईरान इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को बाधित करता है, तो उसका देश गंभीर संकट में पड़ सकता है। उन्होंने यहां तक कहा कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका इस जलडमरूमध्य पर नियंत्रण स्थापित कर सकता है और वहां से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क भी लगाया जा सकता है। ट्रंप के अनुसार, समझौता नहीं होने की स्थिति में आर्थिक दबाव के विकल्प भी खुले हैं।
स्विट्जरलैंड में उच्च स्तरीय वार्ता जारी
स्विट्जरलैंड के बर्जेनस्टॉक में चल रही इस वार्ता को पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और इजरायल-लेबनान तनाव के बीच बेहद अहम माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह बैठक केवल एक दिन के लिए निर्धारित है, जबकि अगले चरण में तकनीकी स्तर पर बातचीत आगे बढ़ाने की योजना है।
इस वार्ता में अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाक़र ग़ालिबाफ अपने-अपने प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। मध्यस्थता की भूमिका में कतर और पाकिस्तान भी शामिल हैं। वहीं, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रोसी भी तकनीकी मुद्दों पर मौजूद हैं।
कतर के विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि वार्ता का उद्देश्य एक व्यापक और स्थायी समझौते की दिशा में आगे बढ़ना है। इसके लिए अलग-अलग तकनीकी और विशेषज्ञ समूह बनाए गए हैं, जो समझौते के विभिन्न पहलुओं पर काम करेंगे।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
वार्ता स्थल को लेकर स्विट्जरलैंड में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। पूरे क्षेत्र को हाई सिक्योरिटी जोन में बदल दिया गया है और हवाई यातायात पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है। कुछ समय के लिए एयर ट्रैफिक सिस्टम में तकनीकी बाधा भी सामने आई, जिसे बाद में ठीक कर लिया गया।
क्षेत्रीय तनाव में वृद्धि
इसी बीच पश्चिम एशिया में स्थिति और गंभीर हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायल ने लेबनान के कई इलाकों में भारी बमबारी की है, जिसमें 500 से 1000 किलो तक के बमों का इस्तेमाल किया गया। इन हमलों से हालात और अधिक तनावपूर्ण हो गए हैं और आम नागरिक क्षेत्रों पर गंभीर असर पड़ा है।
वैश्विक असर की आशंका
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच खाड़ी देशों के शेयर बाजारों में गिरावट देखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है।
कुल मिलाकर अमेरिका-ईरान वार्ता जहां एक ओर कूटनीतिक समाधान की उम्मीद जगाती है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय संघर्ष और कड़े बयानों ने हालात को और अधिक जटिल बना दिया है।
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