जीतन राम मांझी ने जताया असंतोष, राज्यसभा सीट नहीं मिलने पर रणनीति पर विचार के संकेत

गया। पूर्व बिहार मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने रविवार को एनडीए में अनुचित व्यवहार का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि उनकी पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) को आगामी राज्यसभा चुनावों में सीट नहीं दी जाती है, तो उन्हें अपनी राजनीतिक रणनीति पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।
गया में कार्यक्रम के दौरान दिए बयान
मांझी यह टिप्पणी अपने गयाजी संसदीय क्षेत्र में पार्टी के एक कार्यक्रम के दौरान की। उनके साथ उनके पुत्र और HAM के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा राज्य मंत्री संतोष कुमार सुमन भी मौजूद थे। मांझी ने स्थानीय भाषा मगही में कहा, "अगर हमें हमारा हक नहीं मिला तो हमें अपनी राह खुद बनानी होगी। मेरा मंत्री पद कोई बड़ी बात नहीं है। अगर मैं केंद्रीय कैबिनेट में नहीं भी रहूं तो राजनीतिक रूप से टिक जाऊंगा।"
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी, जिसका संसद में केवल एक सांसद है, अब राज्यसभा में भी प्रतिनिधित्व चाहती है। हालांकि, जब उनसे और सवाल किए गए, तो उन्होंने कहा, "कृपया मेरे शब्दों को संदर्भ से बाहर न पेश करें। मैं अपनी पार्टी का निर्णय नहीं ले सकता, क्योंकि मैं उसका अधिकारी नहीं बल्कि संरक्षक हूं।"
राज्यसभा सीट पर HAM का रुख
80 वर्षीय नेता ने बताया कि उनके इस बयान का कारण मीडिया रिपोर्ट्स थीं, जिनमें कहा गया था कि अप्रैल में होने वाले राज्यसभा चुनावों में बीजेपी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की JD(U) दो-दो सीटें लेंगी, जबकि एक सीट चिराग पासवान की LJP को मिलेगी। मांझी ने कहा, "हमें 2024 के आम चुनाव से पहले दो लोकसभा और एक राज्यसभा सीट देने का वादा किया गया था। हमें केवल एक लोकसभा सीट ही मिली, जिसे हमने NDA के लिए जीत हासिल की। राज्यसभा सीट का वादा अब तक पूरा नहीं हुआ। यही मैं अपने पार्टी कार्यकर्ताओं के सामने उजागर करना चाहता था।"
मांझी का यह बयान आगामी राज्यसभा चुनावों में HAM की भूमिका और उनके राजनीतिक कदमों पर सवाल खड़ा करता है, जिससे बिहार की राजनीतिक गतिविधियों में नई हलचल देखने को मिल सकती है।
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